पिनानी पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार के भाजपा प्रत्याशी रमेश पोखरियाल निशंक का गांव है। निशंक अविभाज्य उत्तर प्रदेश के जमाने से इस क्षेत्र की सियासत के सितारे रहे हैं।
इस लिहाज से उनके अपने गांव में पर्याप्त विकास होना चाहिए। अमर उजाला ने ग्राउंड जीरो पर जाकर निशंक के गांव का हाल जाना।
पहाड़ के दूसरे गांवों की तरह निशंक के गांव में भी यह कहावत चरितार्थ होती नजर आई कि यहां का पानी और जवानी काम नहीं आती।
पहाड़ियों से घिरा यह गांव कुदरती सौंदर्य से भरपूर
पौड़ी मुख्यालय से पिनानी 68 किलोमीटर दूर है और पहुंचने में लगते हैं तीन घंटे। मुख्य बाजार पाबौ से होते हुए पिनानीधार पहुंच गए।
यहां तक सड़क अपेक्षाकृत ठीकठाक है। पिनानीधार से हमने जैसे ही पिनानी गांव के लिए उतरना शुरू किया तो कच्ची सड़क शुरू हो गई। धूल परेशान करने लगी।
सड़क 2008-09 में बनी थी लेकिन डामरीकरण अभी तक नहीं हो पाया है। अब कुछ काम शुरू हुआ है। पिनानी गांव पश्चिमी अमेली पहाड़ी के तलहटी में बसा है।
दो तरफ से बांज व अन्य प्रजाति के जंगलों से आच्छादित पहाड़ियों से घिरा यह गांव कुदरती सौंदर्य से भरपूर है।
गांव में चिकित्सा की कोई सुविधा नहीं
कृषि और पशुपालन लोगों की आजीविका का मुख्य जरिया है जिससे गांव में बंजर खेत नहीं दिखे। सारिम तोक में बचन सिंह नेगी ने बताया कि पिनानी में पहले करीब डेढ़-दो सौ तक परिवार थे।
कई परिवार यहां से पलायन कर चुके हैं। अब गांव में 75 से 100 के बीच परिवार रह रहे हैं। गांव में चिकित्सा की कोई सुविधा नहीं है। गांव के समीप स्थित सिवालधार के अस्पताल में पहले डाक्टर तैनात था।
छह साल पहले उसे यहां स्थानांतरित कर दिया। अस्पताल अब फार्मेसिस्ट के भरोसे है। उपचार के लिए लोगों को पाबौ या पौड़ी जाना पड़ता है। यह भी उल्लेख जरूरी है कि निशंक प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री भी रह चुके हैं।
शिक्षा के मामले में भी गांव का हाल बेहाल
2006 में गांव के जूनियर स्कूल का दर्जा तो हाईस्कूल तक बढ़ा लेकिन भवन नहीं बन पाया। शिक्षकों का भी टोटा है।
स्कूल की नौवीं और दसवीं की कक्षाएं प्रयोगशाला में चल रही हैं। छह से आठवीं की कक्षाएं पिनानी गांव के दूसरे छोर में स्थित जूनियर हाईस्कूल के भवन में संचालित हो रही हैं।
दोनों जगहों के बीच की दूरी करीब दो किलोमीटर है। इंटर की पढ़ाई के लिए यहां के विद्यार्थी गांव से तीन किमी दूर जीआईसी दमदेवल जाते हैं।
गांव में पलायन का सबसे ज्यादा असर दिखा। निशंक के पैतृक घर समेत कई घरों में ताले लटके मिले। निशंक का घर भी ढहने के कगार पर है। अब उनके परिवार का कोई नहीं रहता।
रोजगार की तलाश में कई परिवारों का पलायन
सुविधाओं की कमी और रोजगार की तलाश में कई परिवार पलायन कर गए हैं। अलबत्ता, कुछ गर्मियों में तफरीह के लिए लौटते हैं।
जो लोग बचे हैं पशुपालन जरूर करते हैं। लोगक्षेत्र में पशु अस्पताल की जरूरत बताते हैं।
वर्ष 2011 के बाद गांव में नहीं आए सीएम
गांव वाले बताते हैं कि निशंक आखिरी बार 2011 में आए थे। तब क्षेत्र में जंगली सूअर का मांस खाने से कई लोग बीमार हो गए थे।
उनके साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी भी थे। लेकिन ग्रामीणों में निशंक के प्रति लगाव भी देखा गया। बचाव करते हुए कुछ लोग कहते हैं कि गांव में आने के बाद निशंक घर-घर जाकर सभी से मिलते हैं।
गांव से कई परिवार पलायन कर चुके हैं। सुविधाओं की कमी और रोजगार के संसाधनों का अभाव इसका कारण है।
- मनवर सिंह गुंसाई निवासी पिनानी
गांव में बिजली खराब होती है तो कई दिनों तक ठीक नहीं होती है। सड़क कच्ची है। जिससे काफी दिक्कतें उठानी पड़ती है।
- बचन सिंह नेगी निवासी पिनानी
इस गांव में अधिक तर लोग कृषि और पशुपालन से जुड़े हैं। गांव में पशु अस्पताल नहीं है। इसकी जरूरत है।
- मनोज पोखरियाल निवासी पिनानी