चारधाम यात्रा सीजन शुरू होने से पहले क्षतिग्रस्त सड़क मार्गों का पुनर्निर्माण एक बड़ी चुनौती है।
15 अप्रैल तक सभी सड़क मार्गों को करना है दुरुस्त
आपदा से विकसित हुए नए भूस्खलन जोन अब भी दरकते हुए सड़कों पर मलबा बिखेर रहे हैं। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को 15 अप्रैल तक सभी सड़क मार्गों को यातायात के लिए दुरुस्त करना है।
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लेकिन अब तक किसी भी यात्रा मार्ग पर भूस्खलन जोन के बदले वैकल्पिक मार्ग तो दूर क्षतिग्रस्त हिस्सों का पुनर्निर्माण कार्य तक शुरू नहीं हो पाया है।
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रुद्रप्रयाग से जोशीमठ तक पुराने भूस्खलन जोन के साथ ही कई नए जोन भी विकसित हुए हैं। इनसे मलबा लगातार गिर रहे है। कमेड़ा (रुद्रप्रयाग और चमोली जिले का बार्डर) से पातालगंगा (जोशीमठ से 15 किमी पहले) तक कई लैंड स्लाइड जोन हैं।
हनुमान चट्टी तक पुल बहने के साथ सड़क क्षतिग्रस्त
जिनमें हल्की बारिश के साथ मलबा गिर रहा है। जोशीमठ से बदरीनाथ तक के लिए अब तक निर्माण शुरू नहीं हुआ है, जबकि पांडुकेश्वर से हनुमान चट्टी तक पुल बहने के साथ सड़क क्षतिग्रस्त है।
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उधर, बीआरओ के लिए चारधाम यात्रा मार्ग पर पुनर्निर्माण का दबाव राज्य सरकार की ओर से लगातार बढ़ रहा है। संगठन के लिए भूस्खलन जोन सबसे बड़ी चुनौती हैं, जिनका इतने कम समय में समाधान संभव नहीं दिख रहा।
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बीआरओ के अधिकारियों की हाल ही में नई दिल्ली में हुई बैठक में क्षतिग्रस्त सड़कों को सुचारु बनाने के लिए स्वीकृति मिली है, लेकिन वैकल्पिक मार्गों के प्रस्ताव विचाराधीन हैं।