चारधाम यात्रा के मामले में उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ प्रदेश सरकार सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती है। प्रदेश सरकार के शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने कहा कि कोर्ट के फैसले की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। लिखित जजमेंट की प्रति प्राप्त होने के बाद सरकार उसका परीक्षण करेगी और आवश्यकता होगी तो सर्वोच्च न्यायालय जाएगी।
चारधाम यात्रा 2021: तीर्थाटन और पर्यटन उद्योग को पटरी पर लाने की कोशिशों को झटका
सोमवार को चारधाम यात्रा पर उच्च न्यायालय के कड़े आदेश के बाद मीडियाकर्मियों के सवालों के जवाब में शासकीय प्रवक्ता ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के संबंध में प्रदेश सरकार ने पूरी तरह परीक्षण करने और सारी व्यवस्था देखने के बाद निर्णय लिया था।
इसके तहत यह देखा गया था कि चारों धामों में 750 यात्री दर्शन कर सकते थे, यह संख्या सीमित की थी। एक-एक वरिष्ठ अधिकारी को हर धाम में देवस्थानम बोर्ड व जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर यात्रा की मॉनिटरिंग कराने का फैसला किया गया था। ऐसी परिस्थिति में उच्च न्यायालय ने जो स्टे किया है, उसकी प्रति मिलने और उसका परीक्षण करने के बाद सरकार आगे का निर्णय लेगी।
सरकार की लापरवाही से लगी चारधाम यात्रा पर रोक : कांग्रेस
चारधाम यात्रा पर उच्च न्यायालय नैनीताल की ओर से लगाए गए प्रतिबंध पर कांग्रेस ने राज्य सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। आरोप लगाया कि सरकार चाहती ही नहीं है कि इस बार यात्रा हो। कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने राजीव भवन में पत्रकारों से वार्ता करते हूए कहा कि राज्य सरकार उच्च न्यायालय की सवालों का निराकरण नहीं कर पाई।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट सरकार से चारधाम यात्रा की तैयारियों के बारे में जवाब मांग रहा था, आरटीपीसीआर, एंटीजन टेस्ट, ऑक्सीजन आईसीयू की व्यवस्था व यात्रियों की संख्या का नियंत्रण यह सब उच्च न्यायालय की मुख्य चिंताएं थीं। इन विषयों पर न्यायालय राज्य सरकार को फटकार तक लगा चुका था कि कुंभ जैसे हालात नहीं होने दिए जाएंगे, लेकिन राज्य सरकार इसके बावजूद चारधाम यात्रा के पुख्ता इंतजाम के बारे में कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर पाई।