अचार्य के मुताबिक बदरीनाथ धाम में बामणी गांव का नंदा देवी मंदिर, उर्वशी मंदिर, माता मूर्ति मंदिर, माणा गांव के लोगों के ईष्ट देवी, देवों के मंदिर, बदरी नृसिंह मंदिर, महाप्रभु बैठक आदि भी दर्शन के लिए खोले जाते हैं। उनमें भी पूजा पंडा एवं तीर्थ पुरोहित समाज की ओर से ही की जाती है।
क्या कहा था सरकार ने...
मंत्रिपषिद की बैठक में कहा गया था कि चारों धामों में कपाट तय समय पर ही खुलेंगे। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में अगर रावल नहीं पहुंच पाते हैं तो कपाट खुलने की पूजा ऑनलाइन कराने पर भी विचार किया जा सकता है। वैसे सरकार दोनों रावलों को उत्तराखंड लाने की कोशिश में है और शासन ने इसके लिए गृह मंत्रालय को पत्र भी लिखा है।