वैसे तो उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड की स्थापना मंदिरों में सभी प्रक्रियाओं के साथ ही विकास कार्यों के लिए हुआ था, लेकिन बोर्ड अपनी स्थापना से केवल विरोध और कोविड में ही उलझा रह गया।
चारधाम देवस्थानम बोर्ड की वेबसाइट के माध्यम से कोविड के दौरान ऑनलाइन पूजा बुकिंग, बस बुकिंग, हेली सेवा, ऑनलाइन दान आदि की व्यवस्था की गई। जिन मंदिरों के लिए यह बोर्ड बनाया गया था, उनमें भी बोर्ड पूरी तरह से व्यवस्थाएं नहीं संभाल पाया। बोर्ड बनने के बाद कुछ महीने बाद ही कोरोना का प्रकोप शुरू हो गया। फिर लॉकडाउन लग गया।
कोरोना की पहली लहर में चारधाम यात्रा ही शुरू नहीं हो पाई। दूसरी लहर में सीमित समय के लिए यात्रा शुरू हो पाई। चारधाम देवस्थानम बोर्ड अपनी स्थापना के साथ ही विरोध का सामना करता रहा। इस दौरान तमाम दुश्वारियां पेश आईं। बोर्ड के पदाधिकारी तैनात तो किए गए लेकिन श्राइन बोर्ड की तर्ज पर पूरी तरह से सक्रिय नहीं हो पाया।
बोर्ड के सीईओ रविनाथ रमन का कहना है कि बोर्ड ने पौड़ी आदि जगहों में कुछ मंदिरों में छोटे-छोटे काम शुरू किए थे। केदारनाथ में पहले ही केंद्र सरकार के सौजन्य से पुनर्निर्माण कार्य हो रहे हैं। बदरीनाथ में का मास्टर प्लान भी अलग से तैयार हो रहा है। बाकी मंदिरों में अभी बोर्ड का कामकाज शुरू नहीं हो पाया।