खराब मौसम, बाढ़ तथा भूस्खलन, भूकंप, अग्निकांड, हिमस्खलन, बर्फबारी, भारी वर्षा, हेलीकॉप्टर तथा रोड एक्सीडेंट, भगदड़ आदि आपदाओं के दौरान विभिन्न विभाग किस तरह से राहत और बचाव कार्य करेंगे, इसकी तैयारी को मॉक एक्सरसाइज कर परखा जाएगा। यदि कहीं कोई तकनीकी या अन्य दिक्कत आएगी तो उसका तुरंत समाधान किया जाएगा ताकि यात्रा के दौरान कहीं किसी भी स्तर पर कोई कमी न रहे।
उन्होंने कहा कि इस एक्सरसाइज से यह जानना और समझना आसान हो जाएगा कि विभिन्न स्तरों पर सर्च एंड रेस्क्यू का प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति, आर्मी तथा पुलिस बल की तैनाती, मौसम की निगरानी तथा चेतावनी, रिलीफ कैंपों की स्थिति, राहत और बचाव कार्य, भीड़ तथा ट्रैफिक प्रबंधन, संचार साधनों की वास्तविक स्थिति तथा विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय कैसा है। उन्होंने किसी भी आपातकालीन स्थिति में आईआरएस यानी इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम की भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने सभी विभागों को संसाधनों की मैपिंग करने के लिए भी कहा।
बैठक में यह रहे मौजूद
बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन और यूएसडीएमए, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन यूएसडीएमए आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी परिचालन यूएसडीएमए राजकुमार नेगी, संयुक्त सचिव आपदा प्रबंधन विक्रम सिंह यादव, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो. ओबैदुल्लाह अंसारी, अधिशासी निदेशक यूएसडीएमए डॉ. पीयूष रौतेला, प्रभारी एसईओसी राहुल जुगरान, डॉ. विमलेश जोशी, आईआरएस विशेषज्ञ डॉ. वेदिका पंत, विशेषज्ञ जेसिका टेरोन, विशेषज्ञ पूजा राणा, तंद्रिला सरकार, रोहित कुमार, मनी जो आदि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।