दाह संस्कार के लिए चयनित होगी भूमि
केदारनाथ यात्रा में घोड़ा-खच्चर की मौत होने पर, उसका चिह्नित भूमि पर दाह संस्कार भी किया जाएगा। इस व्यवस्था से जहां संचालक मृत जानवरों को नदी या अन्य खुले स्थानों में नहीं फेंक सकेंगे और पर्यावरण भी दूषित नहीं होगा।
351 घोड़ा खच्चरों की हुई मौत
बीते वर्ष 6 मई से 27 अक्तूबर 2022 तक चली केदारनाथ यात्रा में 8512 घोड़ा-खच्चरों का संचालन किया गया। घोड़ा-खच्चरों से 5 लाख 34 हजार से अधिक यात्री धाम पहुंचे। यात्राकाल में रिकार्ड 109 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ लेकिन इस दौरान 351 बेजुबान जानवरों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी।
यात्रा के दौरान संचालकों द्वारा अपने जानवरों को पर्याप्त पौष्टिक भोजन और रास्ते में गर्म पानी पिलाया जा रहा है या नहीं, इसकी नियमित जांच की जाएगी। ऐसा नहीं होने पर संचालक/हॉकर का लाइसेंस रद्द करने के साथ ही उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- डाॅ. आशीष रावत, मुख्य पशुपालन अधिकारी, रुद्रप्रयाग