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Char Dham Yatra 2023: केदारनाथ में केवल स्वस्थ घोड़े-खच्चरों का होगा पंजीकरण, संचालकों को दिए जाएंगे टोकन

Wed, 08 Feb 2023 08:28 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रप्रयाग

सार

घोड़ा-खच्चरों को केदारनाथ यात्रा की रीढ़ कहा जाता है। आपदा के बाद से यात्रा में प्रतिवर्ष घोड़ा खच्चरों की संख्या बढ़ी है। इस कारण, पैदल मार्ग पर पैदल यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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चारधाम यात्रा, केदारनाथ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केदारनाथ यात्रा में घोड़ा खच्चरों का संचालन व्यवस्थित करने के लिए इस बार पंजीकरण व्यवस्था लागू की जाएगी। इसमें स्वस्थ्य घोड़ा-खच्चरों का पंजीकरण होगा। साथ ही प्रत्येक घोड़ा खच्चर का अलग-अलग टोकन नंबर होगा, जिससे उनकी देखरेख हो सके। यही नहीं, गौरीकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चरों के प्रत्येक दो किमी पर पीने के लिए गर्म पानी मुहैया किया जाएगा।

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घोड़ा-खच्चरों को केदारनाथ यात्रा की रीढ़ कहा जाता है। आपदा के बाद से यात्रा में प्रतिवर्ष घोड़ा खच्चरों की संख्या बढ़ी है। इस कारण, पैदल मार्ग पर पैदल यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। साथ ही, बीते वर्षों में यात्राकाल के दौरान कई यात्री घोड़ा खच्चरों के धक्के से गंभीर रूप से घायल भी हो चुके हैं। बीते वर्ष यात्रा में यात्रा में घोड़ा खच्चरों की मौत और अव्यवस्थित संचालन का मामला प्रदेश के साथ-साथ केंद्र सरकार तक गूंजा। इससे सबक लेकर जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग ने पहले से ही योजना बना ली है। इस बार यात्रा में घोड़ा खच्चरों की संख्या सीमित की जाएगी।

Char Dham Yatra 2023: 20 फरवरी से शुरू होंगे पंजीकरण, ऑनलाइन-ऑफलाइन दोनों की होगी व्यवस्था
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यात्रा के पहले दिन से गौरीकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर पड़ावों व अन्य स्थानों पर जांच टीम तैनात की जाएंगी, जो घोड़ा-खच्चरों के संचालन पर पैनी नजर रखेगी। साथ ही सीसीटीवी कैमरा की मदद से जिला मुख्यालय से लेकर आपदा कंट्रोल रूप से भी व्यवस्था की मॉनीटरिंग की जाएगी।

हॉकर, संचालक को मिलेगी फोटा पहचान पत्र
केदारनाथ यात्रा में घोड़ा-खच्चरों के संचालन से जुड़े हॉकर, संचालक व पशु स्वामी को भी फोटो पहचान पत्र जारी किया जाएगा। इस फोटो पहचान पत्र में संबंधित का मोबाइल नंबर, आधार कार्ड नंबर के साथ फोटो अंकित होगा।

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दाह संस्कार के लिए चयनित होगी भूमि
केदारनाथ यात्रा में घोड़ा-खच्चर की मौत होने पर, उसका चिह्नित भूमि पर दाह संस्कार भी किया जाएगा। इस व्यवस्था से जहां संचालक मृत जानवरों को नदी या अन्य खुले स्थानों में नहीं फेंक सकेंगे और पर्यावरण भी दूषित नहीं होगा।

351 घोड़ा खच्चरों की हुई मौत
बीते वर्ष 6 मई से 27 अक्तूबर 2022 तक चली केदारनाथ यात्रा में 8512 घोड़ा-खच्चरों का संचालन किया गया। घोड़ा-खच्चरों से 5 लाख 34 हजार से अधिक यात्री धाम पहुंचे। यात्राकाल में रिकार्ड 109 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ लेकिन इस दौरान 351 बेजुबान जानवरों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी।

यात्रा के दौरान संचालकों द्वारा अपने जानवरों को पर्याप्त पौष्टिक भोजन और रास्ते में गर्म पानी पिलाया जा रहा है या नहीं, इसकी नियमित जांच की जाएगी। ऐसा नहीं होने पर संचालक/हॉकर का लाइसेंस रद्द करने के साथ ही उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- डाॅ. आशीष रावत, मुख्य पशुपालन अधिकारी, रुद्रप्रयाग
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