वर्ष 1963 तक पंचगाईं के समाल्या और भंडारी बाबा केदार के प्रतीक चिन्ह को कंडी में विराजमान कर कपाट खुलने पर केदारनाथ पहुंचाते थे। साथ ही कपाट बंद होने पर शीतकालीन गद्दीस्थल लाते थे। वर्ष 1964 में बिड़ला ग्रुप ने मंदिर समिति को भगवान केदारनाथ के प्रतीक के लिए डोली भेंट की थी।
लेकिन इसी वर्ष पंचगाईं के हक-हकूकधारियों ने डोली को धाम ले जाने में असमर्थता जता दी थी। इसके बाद वर्ष 1964 से 1978 तक कालीमठ घाटी के कुणजेठी के ग्रामीणों ने डोली को धाम तक पहुंचाने व वापस लाने की जिम्मेदारी निभाई। वहीं, वर्ष 1979 से 2020 तक इस परंपरा का निर्वहन रांसी गांव के हक-हकूकधारियों ने किया।
पंचगाईं के लोगों के द्वारा बाबा केदार की डोली को धाम पहुंचाने व वापस लाने से संबंधित अपने हक-हकूकों को लेकर एक पत्र दिया गया था। इसका संज्ञान लेकर उन्हें यह अनुमति दी गई है।
- बीडी सिंह, अपर कार्यधिकारी देवस्थानम बोर्ड।