पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करनी होगी
रिपोर्ट में कहा गया कि रैंणी आपदा की भयावहता की एक बड़ी वजह पूर्व चेतावनी प्रणाली का विकसित न होना और ऐसे हादसों का अनुमान लगा पाने की अक्षमता है। रिपोर्ट में पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित की सिफारिश की गई। कहा गया नदी के ऊपर जहां ग्लेशियर से पानी आ रहा है, वहां एक निगरानी व चेतावनी प्रणाली बनाई जाए जो 24 घंटे ऐसे नियंत्रण कक्ष से नियंत्रित हो। यह आठ-आठ घंटे की तीन पालियों में लगातार सक्रिय रहे। निगरानी करने परियोजना से ही नहीं जिला प्रशासन से भी जुड़े हों। यह ऐसी प्रणाली हो कि एक बटन दबाते ही सभी हितधारकों तक खतरे की सूचना प्रसारित हो जाए।
परियोजना में बचने के रास्ते होने चाहिए
जल विद्युत परियोजनाएं जिनमें सुरंगों को निर्माण हो रहा है, वहां मजदूरों के बाहर निकलने के रास्ते होने चाहिए। सुरंग को खाली कराने के भी अलग रास्ते होने चाहिए। निर्माण लगे मजदूरों को आपदा आने पर बचाने की बार-बार मॉक ड्रिल करानी चाहिए।
ये भी पढ़ें...शौक पड़ा भारी: तमंचे के साथ लगाई युवकों ने सोशल मीडिया पर फोटो, पुलिस ने किया गिरफ्तार, मालिक को भी धरा
संस्थान बनेगा तो बचाव की रणनीति भी बनेगा
रिपोर्ट में उत्तराखंड में राज्य आपदा प्रबंधन संस्थान खोलने की सिफारिश की गई। कहा गया कि उत्तराखंड में इस संस्थान की जरूरत इसलिए है क्योंकि यह राज्य बाढ़, भूस्खलन, भूकंप, हिमस्खलन व अन्य प्राकृतिक आपदाओं को लेकर बेहद संवेदनशील है। इन घटनाओं में जोखिम और नुकसान को कम करने के लिए संस्थान संभावित आपदाओं व उनके जोखिम की तकनीकी व वैज्ञानिक तरीके से पहचान कर सकता है। ऐसे अध्ययन के आधार पर बचाव की रणनीति बनाई जा सकती है।