केंद्र सरकार ने भवन निर्माण सेस के मनमाने खर्च और इससे किसी भी तरह के निर्माण करने पर रोक लगा दी है। इस रोक को चुनावी वर्ष में मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
उत्तराखंड के मायने में यह रोक इसलिए महत्वपूर्ण है कि पिछले पांच-छह दिनों के भीतर इस सेस की मद में एकत्रित धनराशि से श्रमिकों के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित करने की घोषणाएं की गईं थीं और इनमें अधिकांश में निर्माण होना था। मंगलवार को भी प्रमुख सचिव मनीषा पंवार की अध्यक्षता में इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए बैठक हुई, लेकिन इसके एक घंटे बाद ही केंद्रीय श्रम मंत्रालय से रोक संबंधी पत्र आ गया।
बीते बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव ने भवन निर्माण श्रमिकों के हित में तमाम सुविधाएं और योजनाएं शुरू करने संबंधी आदेश जारी किए थे। इस क्रम में श्रमिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश के चिकित्सालयों में 100 बेड आरक्षित किए जाने के साथ ही श्रमिकों के आश्रितों को नर्सिंग कालेजों में 75 सीटें आरक्षित करने का निर्णय लिया गया था।
इसके अलावा उनकी क्षमता विकास के लिए कुमाऊं एवं गढ़वाल में एक-एक आईटीआई निर्माण करने की बात भी तय हुई थी। बड़े पैमाने पर संपन्न किए जाने वाले इन निर्माण कार्य के लिए धनराशि की व्यवस्था भवन एवं अन्य सन्न निर्माण कर्मकार कल्याण निधि (वीओसीडब्लू) से होनी थी।