रुड़की में सीबीएसई 10वीं की बोर्ड परीक्षा में छात्रों के कम अंक आने पर अभिभावकों ने स्कूल पहुंचकर प्रबंधक के खिलाफ नारेबाजी की। आरोप है कि परीक्षा परिणाम घोषित होने से पहले स्कूल प्रबंधक ने छात्रों से अच्छे नंबर के बदले पैसे मांगे थे। जिन बच्चों ने रुपये देने से इनकार कर दिया था, उनके बेहद कम नंबर आए हैं। जिन छात्रों ने रुपये दे दिए थे उनके बहुत अच्छे नंबर आए हैं।
कोरोना महामारी के कारण इस बार 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं नहीं हो हुई थीं। स्कूलों ने ही बोर्ड के बताए निर्देश पर अंक भेजे हैं। स्कूलों की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर ही बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित किया है। हाल ही में जारी परीक्षा परिणाम से जहां बहुत से छात्र खुश हैं तो वहीं बहुत से छात्रों में असंतोष भी है। परीक्षा में अपेक्षा से बेहद कम अंक आने पर दिल्ली रोड स्थित एक स्कूल के छात्रों में रोष है। बुधवार को छात्रों और अभिभावकों ने स्कूल के गेट पर हंगामा किया। अभिभावकों ने स्कूल प्रधानाचार्य और प्रबंधक से बात करनी चाहिए, लेकिन उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया। अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चों के 50 से 60 प्रतिशत के बीच ही नंबर आए हैं।
जबकि, पिछली कक्षा में उनके बच्चों का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा था। कुछ ऐसे बच्चों को 90 प्रतिशत से भी ज्यादा अंक दे दिए गए हैं, जिनके पिछली कक्षाओं में बहुत कम अंक थे। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय ने अच्छे अंक देने के लिए बच्चों से परीक्षा परिणाम घोषित होने से पहले रुपये की मांग की थी। उन्होंने स्कूल को अतिरिक्त रुपये देने से मना कर दिया था, इसलिए उनके बच्चों को पासिंग नंबर ही दिए गए हैं। उन्होंने बोर्ड से स्कूल के रिजल्ट की जांच कराने की मांग की है। वहीं, मामले में मुख्य शिक्षा अधिकारी हरिद्वार डॉ. आनंद भारद्वाज ने बताया कि अभी लिखित शिकायत नहीं मिली है। हालांकि, इस तरह की शिकायत मिली है। वह अपने स्तर से पूरे मामले की जांच कराएंगे।