पीयू के फार्मेसी विभाग की चेयरपर्सन प्रो. इंदु पाल कौर को पांच पेटेंट मिले हैं, जो जीवन को आसान बनाएंगे। इनके अलावा केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की प्रो. सीमा कपूर व पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज की प्रो. उमा बत्रा ने संयुक्त शोध करके पेटेंट पाया है। पंजाब यूनिवर्सिटी और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसरों को बोन ग्राफ्ट विकसित करने के लिए पेटेंट दिया गया है। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ की प्रोफेसर उमा बत्रा ने कहा, "हमने रासायनिक प्रतिक्रिया और बिना किसी प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करके बोन ग्राफ्ट बनाया है। यह पूरी तरह से सिंथेटिक है।
कुछ दिनों पहले यूआईईटी के डॉ. प्रशांत जिंदल व उनकी टीम को पेटेंट मिला है। कुछ समय पहले रसायन विज्ञान विभाग की डॉ. गुरप्रीत कौर को पेटेंट हासिल हुआ। कुछ अन्य शिक्षक भी इस लाइन में हैं, जिनके पेटेंट की रिपोर्ट आना बाकी है। बताया जाता है कि नैक रैंकिंग का समय नजदीक आने के कारण भी पेटेंट पीयू के हाथ लग रहे हैं।
पिछले वर्षों में रिसर्च प्रोजेक्ट खूब मिले, पर पेटेंट कम रहे
पिछले वर्षों के आंकड़ों को देखें तो वर्ष 2019-20 में पीयू को 163 प्रोजेक्ट मिले। इन पर 28.67 करोड़ रुपये खर्च हुए। 25 एजेंसियों ने फंड दिया था। इसी तरह वर्ष 2018-19 में 148 रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए 19.43 करोड़ रुपये पीयू के हाथ लगे। इसमें फंडिड एजेंसियां 28 थीं। वर्ष 2017-18 में 138 प्रोजेक्ट थे, जिन पर 25.42 करोड़ रुपये व्यय हुआ। इस साल भी शोध प्रस्ताव 150 से अधिक चल रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जिस तरह रिसर्च प्रोजेक्ट मिले हैं उस हिसाब से पेटेंट की संख्या कम रही।
पेटेंट एक ऐसा कानूनी अधिकार है जो किसी व्यक्ति या संस्था को किसी विशेष उत्पाद, खोज, डिजाइन, प्रक्रिया या सेवा के ऊपर एकाधिकार देता है। पेटेंट प्राप्त करने वाले व्यक्ति के अलावा यदि कोई और व्यक्ति या संस्था इनका उपयोग (बिना पेटेंट धारक की अनुमति के) करता है तो ऐसा करना कानूनन अपराध माना जाता है।
ऐसे मिलता है पेटेंट
भारतीय पेटेंट कार्यालय में अपने उत्पाद या तकनीकी पर पेटेंट लेने के लिए आवेदन किया जाता है और साथ ही अपनी नई खोज का ब्योरा देना होता है। उसके बाद पेटेंट कार्यालय उसकी जांच करता है और अगर वह उत्पाद या तकनीकी या विचार नया है तो पेटेंट का आदेश जारी कर दिया जाता है। मालूम हो कि किसी उत्पाद या सेवा के लिए लिया गया पेटेंट सिर्फ उसी देश में लागू होगा, जहां पर पेटेंट करवाया गया है।
पीयू को इस बार 10 पेटेंट हासिल हुए हैं। कोरोना काल में भले ही पीयू बंद रहा हो, लेकिन यहां के शोधकर्ताओं ने काफी मेहनत की है। अभी कुछ और पेपर जर्नल में प्रकाशित होने हैं। शोध पर पीयू तेजी से कार्य कर रही है। -रेनुका बी सलवान, निदेशक जनसंपर्क कार्यालय पीयू