उत्तराखंड में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलॉजी के रूप में एक और केंद्रीय संस्थान की स्थापना होगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री हरीश रावत और केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार के बीच वार्ता में तमाम बिंदुओं पर सहमति बनी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संस्थान की स्थापना से प्रदेश में प्लास्टिक वेस्ट के निस्तारण में सहयोग मिलेगा। साथ ही नई तकनीक के प्रयोग से प्लास्टिक को रिसाइकल करके उपयोग में लाया जा सकेगा। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार की ओर से इस संस्थान की स्थापना के लिए हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
रोजगार के नए अवसर
केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में इस संस्थान की स्थापना से हमारे युवाओं को शोध और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे। राज्य सरकार का यह प्रयास भी होगा कि संस्थान को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाए।
आज के दौर में प्लास्टिक निस्तारण की समस्या सभी के लिए जटिल होती जा रही है। इससे पर्यावरण खासकर नदियों, जंगल को भारी क्षति हो रही है। संस्थान की स्थापना से राज्य को काफी लाभ होगा। उत्तराखंड के अलावा यह अन्य राज्यों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगा।
सर्वेक्षण के लिए जल्द आएगी टीम
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि देहरादून में देश की शीर्ष वैज्ञानिक संस्थाएं स्थापित हैं, जो देश के लिए बेहतरीन शोध परक कार्य कर रही हैं। वार्ता की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार एवं प्रवक्ता सुरेंद्र कुमार ने बताया कि इस सिलसिले में जल्द ही केंद्र की एक टीम सर्वेक्षण कार्य के लिए उत्तराखंड आएगी।