भाजपा में टिकट नहीं मिलने से नाराज नेताओं की संख्या हर रोज बढ़ती जा रही है। अब अल्मोड़ा संसदीय सीट से टिकट नहीं मिलने से नाराज एसएसी/एसटी आयोग के अध्यक्ष रहे चनरराम के भी सुर बागी हो गए हैं।
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उपेक्षा का आरोप लगाते हुए उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने या किसी दूसरे सियासी दल में जाने का संकेत दिया है।
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उधर, हरिद्वार से टिकट न मिलने से रूठे मदन कौशिक ऊपरी तौर पर भले ही कह रहे हैं कि वह पार्टी के सिपाही हैं, लेकिन अभी भी वह निशंक के पक्ष में खुलकर नहीं आए हैं।
पार्टी पर लगाया उपेक्षा का आरोप
अल्मोड़ा से फोन पर हुई बातचीत में चनरराम ने कहा कि अल्मोड़ा से चुनाव लड़ने के दावेदारों के पैनल में मेरा भी नाम हाईकमान को भेजा गया था लेकिन मेरे नाम पर विचार तक नहीं किया गया। आरोप लगाया कि पार्टी ने ऐसे आदमी को टिकट दिया है जो वर्ष 2009 का चुनाव हार गया था।
विधानसभा में भी टिकट कटा
चरनराम ने कहा कि भाजपा में मेरी लगातार उपेक्षा की जा रही है। वर्ष 2012 के विधानसभा के चुनाव में गंगोलीहाट विधानसभा क्षेत्र से मेरा टिकट काट दिया गया था। तब वहां से गीता ठाकुर को टिकट दिया गया और वह हार गईं।
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इस बार भी पार्टी ने पिछले चुनाव में हारे अजय टम्टा को टिकट देकर मेरी उपेक्षा की है। इसका खामियाजा भाजपा को भुगतना ही पड़ेगा।
बचदा के हैं खास
बता दें कि पूर्व आईएएस चनरराम 2006 में सेवानिवृत्त होने के बाद भाजपा के साथ जुड़ गए थे। वर्ष 2010 से 2013 तक वह एसएसी/एसटी कमीशन के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं।
चनरराम को बचदा का खास माना जाता है। माना जाता है कि चनरराम को टिकट नहीं मिलने से बचदा नाराज हैं।