पिछले पांच साल में प्रदेश सरकार ने सब्सिडी के खर्च में 83 प्रतिशत कटौती कर दी। सरकार के खजाने पर अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन, मजदूरी, पेंशन और ब्याज का खर्च लगातार बढ़ता गया और सब्सिडी का खर्च कम होता चला गया।
हाल ही में जारी महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के खजाने पर वचनबद्ध खर्च का बोझ लगातार बढ़ रहा है। अकेले वेतन पर ही पिछले पांच साल में 48 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2015-16 में प्रदेश सरकार का वेतन और मजदूरी पर खर्च 7,848 करोड़ रुपये था, जो 2019-20 में बढ़कर 11,714 रुपये हो गया। पांच वर्षों में वेतन व मजदूरी का खर्च कुल बजट का 36.96 प्रतिशत से बढ़कर 38.13 प्रतिशत हो गया।
कल्याणकारी राज्य की छवि के विपरीत सरकार के सब्सिडी खर्च में कमी आई है। वर्ष 2015-16 में प्रदेश सरकार ने सब्सिडी पर 211 खर्च हुए। सब्सिडी की मद में खर्च लगातार घटा और 2019-20 में यह घटकर महज 35 करोड़ रह गया।
दीन दयाल उपाध्याय कृषक योजना में सबसे अधिक सब्सिडी खर्च
वर्ष 2019-20 में प्रदेश सरकार ने सब्सिडी पर 35 करोड़ रुपये खर्च किए। खर्च की गई कुल राशि में सबसे अधिक 26 करोड़ रुपये की सब्सिडी दीन दयाल उपाध्याय सहकारिता कृषक कल्याण योजना पर खर्च की गई। इसके अलावा चार करोड़ खादी वस्त्रों की बिक्री पर छूट, तीन करोड़ पॉली हाउस विविधिकरण एवं स्प्रिंकलर वॉटर पंप योजना व दो करोड़ इंदिरा अम्मा भोजनालय योजना के तहत खर्च किए गए।
पांच सालों में घटी सब्सिडी
वित्तीय वर्ष - सब्सिडी (करोड़ में)
2015-16 - 211
2016-17- 208
2017-18 - 186
2018-19 - 174
2019-20 - 35
ऐसे बढ़ा वेतन, पेंशन व ब्याज का खर्च
वित्तीय वर्ष - वेतन मजदूरी - पेंशन - ब्याज - कुल योग
2015-16- 7,848 - 2,628 - 2,971 - 13,658
2016-17 - 8,670 - 3,170 - 3,723 - 15,771
2017-18 - 10,496 - 5,033 - 3,987 - 19702
2018-19 -11,525 - 5,396 - 4,475 - 21,570
2019-20 -11,714 - 5,507 - 4,504 - 21,760
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