एक मिनट लेट होने पर बीस रुपए का जुर्माना बचाने के लिए देहरादून के सिटी बस चालक आए दिन लोगों को सड़कों पर कुचल रहे हैं।
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बेलगाम दौड़ती सिटी बसों की वजह से पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं रह गया है। सोमवार को पैदल जा रही एक महिला को सिटी बस ने ऐसी टक्कर मारी कि मंगलवार को उसकी अस्पताल में मौत हो गई।
बसंत विहार क्षेत्र में संकरी सड़क पर सिटी बस की तेज रफ्तार इस हादसे का कारण बनी। हालांकि, सिटी बस चालक मौके से फरार नहीं हुआ। उसने गंभीर घायल महिला का ऑटो से अस्पताल पहुंचाया।
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खुद ही थाने पहुंच गया आरोपी ड्राइवर
बसंत विहार थाना क्षेत्र के हरबंशवाला निवासी बीर सिंह एक एनजीओ में कर्मचारी हैं। उनकी पत्नी रजनी सोमवार शाम बेटे को इंदिरानगर में ट्यूशन छोड़ने के बाद पैदल घर लौट रही थीं।
इसी दौरान सीमाद्वार से आगे बसंत विहार थाने के मोड़ पर पीछे से आ रही सिटी बस ने उन्हें टक्कर मार दी। लोगों के अनुसार बस चालक ने सामने से आई दूसरी बस को क्रॉस करते समय स्पीड कम नहीं की।
जबकि यह सड़क बेहद संकरी है। हादसे के बाद सिटी बस चालक महिला को ऑटो से दून अस्पताल ले गया, लेकिन इसके बाद वह गायब हो गया। सूचना मिलते ही बीर सिंह और दूसरे लोग अस्पताल पहुंचे और रजनी को महंत इंद्रेश अस्पताल लाया गया। यहां उनकी मौत हो गई।
मंगलवार को आरोपी चालक नदीम निवासी चूना भट्टा बस के साथ खुद थाने पहुंच गया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
संकरी सड़क और बसों की दौड़
बसंत विहार थाने का यह तिराहा हादसों का मोड़ बन गया है। दरअसल, सीमाद्वार के बाद थाने की तरफ ढलान के साथ तीखा मोड़ है।
मोड़ के पास रहने वाले राम का कहना है कि सड़क संकरी है, लेकिन वाहन हवा से बातें करते हैं। सिटी बस चालक तो स्पीड कम करते ही नहीं।
इसीलिए आए दिन इस मोड़ पर एक्सीडेंट होते हैं। यहां स्पीड ब्रेकर भी नहीं है। कई बार मांग करने के बावजूद पुलिस और प्रशासन ने कुछ नहीं किया।
पुलिस और प्रशासन को आम लोगों की जिंदगी से सरोकार नहीं है। किसी तरह की कार्रवाई न किए जाने के कारण सिटी बस मनमाने ढंग से दौड़ रही हैं। इस सड़क पर बसों का आवागमन रुकना चाहिए। - संजय ठाकुर, स्थानीय निवासी
बसंत विहार थाने के इस मोड़ पर हादसे रोकने के लिए सार्थक प्रयास किए जाने की जरूरत है। ओवर स्पीड दौड़ने वालेे वाहन चालकों पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है। अन्यथा इस हादसे होते रहेंगे। - समीर, दुकानदार
आसानी से मिल जाएगी जमानत
बसंत विहार में हुई महिला की मौत के मामले में सिटी बस चालक के खिलाफ 304-ए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
इस धारा में चालक को बाहर से बाहर जमानत देने का प्रावधान है। यदि मुकदमा 304 यानी गैर इरादतन हत्या की धारा में दर्ज होता तो जमानत में कई दिन लग जाते।
आखिर कब जागेगी पुलिस? बीते मई माह में भी ओएफडी में तैनात एक निजी गार्ड को सिटी बस ने कुचल दिया था। बाइक सवार गार्ड की मौके पर ही मौत हो गई थी।
इसके बाद पांच जुलाई को सहस्त्रधारा रोड पर सिटी बस ने बुजुर्ग महिला को कुचल दिया। जबकि, पिछले वर्ष कारगी चौक पर स्कूटी सवार महिला पुलिस दारोगा भी सिटी बस की चपेट में आ गई थी।
लगातार हादसे होने के बावजूद पुलिस सिटी बसों की रफ्तार पर शिकंजा नहीं कस पाई है।
सिटी बसों की बेलगाम रफ्तार के पीछे चालकों पर एक मिनट की देरी पर लगने वाला बीस रुपए का जुर्माना है।
तय समय से लेट होने पर संबंधित बस चालक से यह जुर्माना लिया जाता है। इसी से बचने के लिए सिटी बसों के चालक एक्सीलेटर से पैर नहीं हटाते।
नतीजा बेकसूर लोगों की मौत के रूप में सामने आता है। इस जुर्माने के कारण तमाम हादसे हो चुके हैं, लेकिन न पुलिस की नींद टूटी न आरटीओ विभाग की।
बसों के देरी से पहुंचने पर अगर जुर्माना नहीं लगेगा तो एक बस के पीछे दूसरी बस लग जाएगी। बसों में निश्चित दूरी बनाए रखने के लिए जुर्माने की व्यवस्था बनाई गई है। इससे दो बसों में आपसी संघर्ष होने से बच जाता है और बसों में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ भी नहीं लगती। - विजय वर्धन डंडरियाल, सिटी बस महासंघ के अध्यक्ष