तमाम मशक्कत के बाद तैयार नए सर्किल रेट में खेल हो गया है। ऊपरी तौर पर भले ही इसमें दी गई व्यवस्थाएं आम आदमी को राहत देने वाली लगती हों, लेकिन इससे बिल्डरों को ही अधिक लाभ होने वाला है।
सूत्र बताते हैं कि सहस्रधारा रोड और मसूरी डायवर्जन रोड पर सर्किल रेट की दर कम रखना और अपार्टमेंट में ऊपरी मंजिल के फ्लैटों का सर्किल रेट कम रखने के पीछे बिल्डर लॉबी को राहत देने की कवायद है। गौर करने की बात है कि इसी इलाके में तमाम बिल्डरों के प्रोजेक्ट या तो चल रहे हैं या लांच होने वाले हैं।
सूत्रों की मानें तो सर्किल रेट के रिवीजन को तीन बार टालने के पीछे बिल्डरों को फायदा पहुंचाने का ही खेल था। बिल्डर और भूमि कारोबारी शासन स्तरीय कुछ अफसरों पर दबाव बनाए हुए थे। उनका कहना था कि रियल इस्टेट में मंदी की वजह से फ्लैट नहीं बिक रहे हैं।
बिल्डर लॉबी के दबाव में जिला प्रशासन की ओर से प्रस्तावित 24 कॉलम वाला फार्मेट दरकिनार किया गया। रियल इस्टेट के धंधे को किक देने के लिए अफसरों ने खास ताना-बाना बुना, जो दिखने में आम आदमी के फायदे का दिखे, लेकिन असल में फायदा बिल्डरों को हो।
बिल्डरों की मदद पहुंचाने के लिए तय हुए रेट
यही वजह है कि नए सर्किल रेट में ग्रुप हाउसिंग वाले क्षेत्रों की दर घटाई गई है। उन क्षेत्रों में रेट कम बढ़ाए गए हैं, जहां इस वक्त सबसे अधिक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट चल रहे हैं। प्रस्तावित क्षेत्रों में रेट अन्य क्षेत्रों के मुकाबले कम हैं। दूसरी ओर, सर्किल रेट के जरिये बिल्डरों के फ्लैट बिकवाने में भी परोक्ष मदद की गई है।
दरअसल, बिल्डरों को तीसरी और चौथी मंजिल के फ्लैट बेचने में ज्यादा दिक्कत होती है। सहस्त्रधारा रोड, डायवर्जन, हरिद्वार रोड पर बहुमंजिली इमारतों के ऊपर वाले फ्लैट खाली हैं।
फ्लैटों के अलग-अलग सर्किल रेट तय करने का कोई तुक नहीं है। दिल्ली में भी मल्टी स्टोरी बिल्डिंग के सभी फ्लैटों का सर्किल रेट एक ही होता है। ग्राउंड फ्लोर से पहले ऊपर के फ्लैट बिकते हैं। वेंटीलेशन ऊपर के फ्लैट में अच्छा होता है।
-सचिन अग्रवाल, सदस्य उत्तराखंड आर्किटेक्ट एसोसिएशन।
(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी- razas@knp.amarujala.com या इस नंबर- 9675898214 पर संपर्क कर सकते हैं।)