केंद्र सरकार ने उत्तराखंड सरकार के शिक्षा बजट को केवल 22 प्रतिशत पास किया है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत बजट के लिए राज्य की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में केंद्र ने 88 फीसदी की कटौती कर दी है।
सरकारी स्कूल दुर्दशा का शिकार
शिक्षा सत्र 2014-15 के लिए 174 करोड़ 23 लाख रुपये का प्रस्ताव प्रदेश ने केंद्र को भेजा था, लेकिन केंद्र सिर्फ 39 करोड़ 6 लाख रुपये की मंजूरी दी है। प्रदेश के सरकारी स्कूल दुर्दशा का शिकार हैं। हल्की बारिश में तमाम स्कूलों की छत टपकने लगती है।
वहीं, 300 से अधिक स्कूलों के पास भवन नहीं है। स्कूलों की मरम्मत कर 192 स्कूलों में बालिकाओं के लिए शौचालय, 165 में रैंप और अतिरिक्त कमरों के निर्माण के लिए केंद्र को भारी भरकम बजट भेजा गया था।
इससे प्रदेश में छोटे बड़े कुल 4990 काम होने थे, लेकिन केंद्र ने प्रस्ताव में कटौती कर दी है। जाहिर है कि इस सत्र में भी बच्चों और मुसीबतों का साथ बना रहेगा। देहरादून में ही वर्ष 2012-13 के निर्माण कार्यों के कई बिल अटके हैं। पिछली देनदारी नहीं हो पाई है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत इस बार पिछले सत्र के मुकाबले ज्यादा बजट मिला है। बजट कितना देना है, यह केंद्र सरकार पर निर्भर करता है। हम तो जानबूझकर अधिक से अधिक बजट का प्रस्ताव बनाकर भेजते हैं।
- एस राजू, अपर मुख्य सचिव
आरटीई की फीस भूला केंद्र
आरटीई लागू होने के बाद वर्ष 2011 में प्रदेश भर में गरीब परिवारों के हजारों बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला तो करा दिया गया, लेकिन बच्चों की फीस जमा नहीं हो पाई है।
यह फीस केंद्र की ओर से जमा की जानी थी। यही वजह है कि अब पब्लिक स्कूल बच्चों के दाखिले को तैयार नहीं हैं। एक अनुमान के मुताबिक दून में ही 10 करोड़ रुपये की फीस बकाया है।