सदन में पेश हुए बजट पर जब गौर करते हैं तो यह सिर्फ इस रूप में अनूठा है कि पहली बार सरकार लक्ष्य आधारित विकास की ओर बढ़ रही है। पर्यटन राज्य में मानव संसाधन विकास, सेवा क्षेत्र को विस्तार देने वाले निवेश और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में सड़क, रोपवे और हवाई कनेक्टिविटी पर सरकार का खास फोकस है।
लेकिन इस लक्ष्य साधने के लिए उसे केंद्र से 20893 करोड़ रुपये की दरकार है। राजस्व और पूंजीगत खर्चों को पूरा करने के लिए सरकार करीब 19460 करोड़ रुपये कर्ज लेगी। इसमें लोक ऋण का हिस्सा 18 हजार करोड़ से अधिक का है।
कर्मचारियों के वेतन-पेंशन पर 26 हजार करोड़ खर्च होंगे
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन-भत्तों व पेंशन के लिए धनराशि जुटाने की है। एक साल में अकेले वेतन पर ही 18 हजार करोड़ और पेंशन पर 7601 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यानी सरकार को 26 हजार करोड़ से अधिक राशि इन मदों के लिए जुटानी होगी। सरकार की आमदनी में से 11,525 करोड़ रुपये पुराने कर्ज की किस्त लौटाने और 6166 करोड़ वर्षों से लगातार लिए जा रहे कर्ज का ब्याज चुकाने पर खर्च करने होंगे।