अरुण जेटली के बजट की गुगली से प्रदेश सरकार को जोर का झटका लगना तय है। केंद्रीय करों में राज्य के हिस्से में कुल मिलाकर 681 करोड़ रुपये का ही इजाफा होने जा रहा है।
जबकि प्रदेश के राजस्व बजट का खासा हिस्सा केंद्रीय करों में राज्य के हिस्से का है। ऐसे में नई योजनाओं के लिए राज्य को अपने स्तर पर संसाधन भी जुटाने होंगे। यह तब है जब केंद्रीय सहायता में भी लगातार कमी हो रही है।
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट ने इस बार दूसरे तरीके से भी प्रदेश सरकार की परेशानी को बढ़ा दिया है। केंद्रीय करों में राज्य को अपने हिस्से के रूप में इस बार केवल 6,014 करोड़ रुपये ही मिलने का अनुमान है। यह इससे पहले के वर्ष के मुकाबले केवल 681 करोड़ रुपये ही अधिक है। मुसीबत यह है कि केंद्रीय सरकार से सहायता अनुदान में भी तेजी से कमी आ रही है। 14वें वित्त आयोग की संस्तुति लागू होने के बाद यह विशेष सहायता बंद की जा चुकी है।
ऐसे में प्रदेश सरकार को दोहरा झटका लगा है। मुसीबत यह भी है कि यह चुनावी साल है। बजट में नए कर प्रस्ताव लाने का जोखिम भी सरकार नहीं उठाने का फैसला कर चुकी है। ऐसे में केंद्रीय करों में राज्य के अपने हिस्से पर उसकी निर्भरता बनी रहेगी। ऐसे में इस मद में कमी होने से सरकार के सामने नए आर्थिक संसाधन जुटाने का ही विकल्प रह जाएगा।