केंद्र सरकार ने बजट में इस बार उत्तराखंड को कुछ नहीं दिया, लेकिन पिछले साल जो घोषणा की थी वह भी अब तक पूरी नहीं हुई।
अंतरिम बजट में हिमालयन राज्यों के अध्ययन के लिए ‘नेशनल सेंटर फॉर हिमालयन स्टडीज इन उत्तराखंड’ बनाने की घोषणा पर केंद्र सरकार एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी है। प्रदेश सरकार को भी इसका इंतजार है, लेकिन इस बार बजट में इसका जिक्र तक नहीं आया।
दस जुलाई 2014 को सभी हिमालयन राज्यों के लिए पेश हुए अंतरिम बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि 100 करोड़ रुपये लागत से उत्तराखंड में नेशनल सेंटर फॉर द हिमालयन स्टडीज की स्थापना की जाएगी। इस केंद्र में हिमालयन राज्यों पर विस्तृत अध्ययन के साथ पलायन रोकने के लिए नीति निर्माण का काम भी होगा।
हिमालयन राज्यों में प्राकृतिक आपदाओं की रोकथाम के लिए भी यहां जरूरी योजनाएं बननी थीं। लेकिन दस माह बाद यह सिर्फ घोषणा ही रह गई है। प्रदेश की वित्त और उच्च शिक्षा मंत्री इंदिरा हृदयेश का कहना है कि उत्तराखंड के लिए यह घोषणा अच्छी थी, लेकिन तब से अब तक केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार से एक बार भी पत्राचार नहीं किया है।
100 करोड़ की लागत से यह केंद्र कहां बनना है, इसकी भी जानकारी नहीं दी गई है। न ही केंद्र ने अब तक जमीन की मांग की है।
इन राज्यों के लिए बनना था केंद्र
उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा
नहीं दिखी सेहत की चिंता
जेटली के बजट में चिकित्सा-स्वास्थ्य के लिए अलग व्यवस्था न होने से डाक्टर निराश हैं। उनका कहना है कि अब नई दवाओं की खोज और घातक रोगों के इलाज के लिए शोध कार्य करना मुश्किल होगा। इसके अलावा जीवनरक्षक औषधियों, सर्जरी, पैथोलॉजी उपकरणों के दाम न घटने से मरीजों को भी र्कोई राहत नहीं मिलेगी।
प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के पूर्व अध्यक्ष डा. बीसी रमोला का कहना है कि रक्षा बजट की तरह स्वास्थ्य बजट की भी अलग से व्यवस्था होनी चाहिए। तभी शोध होंगे और स्वाइन फ्लू जैसे घातक रोगों की वैक्सीन तैयार होंगी। नई दवाएं बनेंगी।
कैंसर, एड्स, थैलीसीमिया, हेपेटाइटिस बी और सी की दवाएं बहुत महंगी हैं। इलाज गरीबों की पहुंच से बाहर है। औषधि सस्ती होने से उन्हें इलाज मिल सकता था। लेकिन, बजट में ऐसा कुछ नहीं हुआ।
सब्सिडी की थी आस
डाक्टरों का कहना है कि उन्हें गैस, पेट्रोलियम पदार्थों की तरह जीवनरक्षक औषधियों, उपकरणों पर सब्सिडी दिए जाने की उम्मीद थी। घातक वायरल संक्रमण के इलाज को आयात होने वाली दवाओं पर भी कर घटना चाहिए था।
कर्मचारियों को नहीं भाया जेटली का बजट
न भत्ते बढ़े, न ही आयकर छूट का दायरा। आस लगाए बैठे कर्र्मचारियों की उम्मीदों पर जेटली के बजट ने पानी फेर दिया। कर्मचारियों को यह बजट नहीं भाया है। प्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने बजट को निराशाजनक करार दिया है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष ठाकुर प्रह्लाद सिंह और महासचिव प्रदीप कोहली का कहना है कि कर्मचारियों के लिए बजट निराशाजनक है। आयकर स्लैब जस का तस है। उम्मीद थी कि आयकर छूट का दायरा बढ़ेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसके उलट सर्विस टैक्स 12.3 से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया। इससे नौकरीपेशा लोगों पर महंगाई का बोझ और बढ़ेगा।
उत्तराखंड मिनिस्ट्रियल फेडरेशन के प्रांतीय महासचिव सुनील दत्त कोठारी का कहना है कि बचत पर छूट डेढ़ लाख से बढ़ाकर ढाई लाख किए जाने की उम्मीद धरी रह गई। वैट की छूट का दायरा भी नहीं बढ़ाया गया। इससे निराशा हाथ लगी है। इसी तरह उत्तराखंड कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रियल संघ के प्रांतीय महासचिव आशीष वर्मा कहते हैं कि बजट से कर्र्मचारी वर्ग को निराशा हाथ लगी। महंगाई भत्ता वगैरह कुछ नहीं बढ़ाया गया।
बच्चे की कोचिंग हुई महंगी
बजट ने मेडिकल-इंजीनियरिंग की कोचिंग लेने का ख्वाब देख रहे छात्रों के अभिभावकों की जेब काट दी है। सर्विस टैक्स को 12.3 से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने से कोचिंग शुल्क पर असर पड़ेगा। प्रति एक लाख रुपये पर शुल्क 1640 रुपये बढ़ जाएगा। दून में प्रदेशभर से छात्र कोचिंग के लिए आते हैं। ऐसे में प्रदेश के अभिभावकों पर बच्चों के सपने भारी पड़ेंगे।
बजट एक अप्रैल से लागू हो जाएगा। इस लिहाज से सर्विस टैक्स बढ़ते ही कोचिंग को आने वाले छात्रों को थोड़ी ज्यादा फीस देनी पड़ेगी। यानी अगर दो लाख रुपये शुल्क है तो उन्हें करीब साढ़े तीन हजार रुपये ज्यादा देने होंगे।
- डीके मिश्रा, कोचिंग एक्सपर्ट
दून में महंगे होंगे फ्लैट
दून में अपने घर का सपना देख रहे लोगों को झटका लगा है। पहले रेल बजट में माल भाड़े में वृद्धि से निर्माण लागत बढ़ना तय है अब आम बजट में सर्विस टैक्स में 1.64 प्रतिशत की बढ़ोतरी से राजधानी में निर्माणाधीन आवासीय परियोजनाओं में फ्लैट के दाम एक से दो लाख रुपये तक बढ़ जाएंगे। यह बढ़ोतरी आवास के ‘टाइप’ के हिसाब से तय होगी।
फ्लैट की खरीद पर अब तक 12.36 फीसदी सर्विस टैक्स लगता था, जिसे अब बढ़ाकर 14 फीसदी किया गया है। इसके बाद बिल्डर फ्लैटों की कीमत बढ़ाने की तैयारी में हैं। हालांकि, यह बढ़ोतरी उन फ्लैटों पर लागू नहीं होगी जो पहले से बुक हैं।
सर्विस टैक्स ही नहीं, माल भाड़े में भी बढ़ोतरी हुई है। जाहिर है कि ऐसे में निश्चित तौर पर हाउसिंग प्रोजेक्ट की निर्माण लागत बढ़ेगी। इसका असर फ्लैटों की कीमत पर भी पड़ेगा।
- राज लुंबा, निदेशक, जेजे बिल्डर्स
सर्विस टैक्स का सबसे ज्यादा फर्क आम जनता पर ही पड़ेगा। क्योंकि बढ़ी कीमत जनता को ही चुकानी होगी। हाल-फिलहाल में लोगों की रुचि प्लाट की जगह फ्लैट खरीदने में बढ़ी है।
- मोहित, मार्केटिंग मैनेजर, लालाजी प्रो बिल्डर्स
एमडीडीए को सर्विस टैक्स में पूरी छूट संभव
बजट में हुई सर्विस टैक्स की बढ़ोत्तरी से दून में जहां फ्लैट महंगे होने जा रहे हैं, वहीं मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण यानी एमडीडीए को सर्विस छूट में पूरी छूट संभव है। इंतजार वित्त मंत्रालय की हामी का है।
ऐसा हुआ तो निश्चित तौर पर शहरवासी एमडीडीए के हाउसिंग प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देंगे। क्योंकि तीन कमरों के फ्लैट में ही लगभग दस लाख रुपये का फर्क आएगा। जाहिर है, ऐसे में प्राइवेट बिल्डरों को अपने प्रोजेक्ट बेचने में बहुत मेहनत करनी होगी।
मौजूदा वित्त बजट में सर्विस टैक्स बढ़ा दिया है। लेकिन मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण ने कुछ माह पूर्व ही सर्विस टैक्स में छूट के लिए राज्य वित्त मंत्रालय को पत्र लिख दिया था। पत्र में लिखा गया है कि, क्योंकि मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण हाउसिंग प्रोजेक्ट से मुनाफा नहीं कमाता है। ऐसे में, उसे सर्विस टैक्स में छूट मिलनी चाहिए।
एमडीडीए इस संबंध में अभी तक तीन पत्र वित्त मंत्रालय को लिख चुका है। हालांकि वहां से अभी कोई जवाब नहीं मिला है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय एमडीडीए के तर्कों से संतुष्ट है। अब अगर मंत्रालय ने सर्विस टैक्स में छूट दे दी तो एमडीडीए के तरला आम वाला हाउसिंग सोसायटी (लगभग दो हजार फ्लैट) और ट्रांसपोर्ट नगर (लगभग 1800 फ्लैट) प्रोजेक्ट पहले से सस्ते हो जाएंगे।