इधर सीमांत और दुर्गम क्षेत्र में नेटवर्क बेहतर करने के लिए केंद्र सरकार ने पिथौरागढ़ जिले में नौ और चंपावत जिले में सात बीटीएस लगाने की स्वीकृति दे दी है। बीएसएनएल को भरोसा था कि सरकारी क्षेत्र की कंपनी होने के नाते यह काम उसे ही मिलेगा, लेकिन पता चला है कि बीएसएनएल टेंडर के लिए निर्धारित मानक ही पूरे नहीं कर सका और यह काम निजी क्षेत्र की कंपनी जियो ने झटक लिया है।
बीएसएनएल सूत्रों के मुताबिक बीएसएनएल को अभी तक 4-जी स्पेक्ट्रम उपलब्ध नहीं हो सका है। इन टावरों को स्थापित करने के लिए कंपनी के पास 4-जी स्पेक्ट्रम होना जरूरी है। दूसरी ओर जियो के पास पहले ही 4-जी स्पेक्ट्रम उपलब्ध है, जिसके चलते उसने करोड़ों के इस काम को हासिल कर लिया।
सूत्रों के मुताबिक काम मिलने के बाद जियो कंपनी ने पिथौरागढ़ के कुछ इलाकों में सर्वेक्षण का कार्य भी शुरू कर दिया है।
इधर जियो को बीटीएस लगाने का कार्य दिए जाने के संबंध में पूछे जाने पर सांसद अजय टम्टा ने कहा कि संचार क्षेत्र में कार्यों के लिए खुली प्रतियोगिता रहती है और इसके तहत बीएसएनएल सहित जो भी कंपनी क्वालीफाई करती है, वही टेंडर में हिस्सा ले सकती है।
हमारा उद्देश्य है मानक के अनुसार टावर लगाने का कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण हो ताकि लोगों को उचित सुविधा मिल सके। इस बारे में अल्मोड़ा बीएसएनएल के महाप्रबंधक एके गुप्ता का कहना है कि 4-जी स्पेक्ट्रम उपलब्ध नहीं होने की वजह से हम इस टेंडर के लिए क्वालीफाई नहीं कर सके हैं।
अल्मोड़ा एसएसए क्षेत्र के अंतर्गत अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत चार जिलों में बीएसएनएल का सबसे बड़ा नेटवर्क है। अब तक इन चार जिलों में बीएसएनएल के कुल 451 टावर (बीटीएस) लगे हैं।
इनमें 230 टावर 2-जी, 187 थ्रीजी और 34 टावर 4-जी वाले हैं। अब तक ये सभी टावर बीएसएनएल ने खुद लगाए हैं। यह भी पता लगा है कि इन दुर्गम और सीमांत इलाकों में जहां बीएसएनएल सालाना सेटेलाइट खर्च समेत प्रति टावर लगाने पर करीब 70 लाख रुपये खर्च करता है, वहीं जानकारी मिली है कि जियो ने इसके लिए प्रति टावर एक करोड़ रुपये से अधिक का टेंडर दिया है।