दून अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पताल ले जाने के पिछले एक हफ्ते के भीतर तीन मामले अस्पताल प्रशासन के सामने आ चुके हैं। ये संख्या उन मरीजों की है, जिन्होंने बाकायदा लिखित शिकायत अस्पताल प्रशासन से की है।
एक मरीज को तो परिजनों की शिकायत पर दून अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. एनएस खत्री ने एक सामाजिक संस्था के सहयोग से निजी अस्पताल से लाकर दून अस्पताल में भर्ती कराया। निजी अस्पताल प्रबंधन के विरोध पर वहां पुलिस तक बुलानी पड़ी। सूत्रों के अनुसार, इसमें कुछ एंबुलेंस वालों की भी निजी अस्पतालों और दलालों से सांठगांठ है।
इस महिला मरीज को परिजन रुड़की से लेकर दून अस्पताल पहुंचे थे। परिजनों का कहना है कि तीन दिन पहले वह एंबुलेंस से दून अस्पताल पहुंचे ही थे कि तभी एप्रिन पहले कुछ युवक वहां पहुंच गए। उन्होंने कहा कि यहां पर बेड खाली नहीं हैं। दून अस्पताल की दूसरी ब्रांच में ले जाना पड़ेगा। उनके बहकावे में आकर परिजन अपने मरीज को दून अस्पताल से ही कुछ दूरी पर स्थित एक छोटे से अस्पताल में ले गए।
वहां पर उनके मरीज की स्थिति गंभीर बताते हुए आईसीयूू मेें रखने की बात कही। 24 घंटे के आठ हजार रुपए ले लिए। दवाओं का खर्च सो अलग। परिजनों ने आपत्ति जताते हुए मरीज को दून अस्पताल ले जाने की बात कही तो निजी अस्पताल वाले मरीज को खतरा बताते हुए डराने लगे। दून अस्पताल प्रशासन तक जब यह शिकायत पहुंची कि उनके अस्पताल से मरीज को बरगलाकर जबरन वहां से ले जाया गया है, तो दून अस्पताल प्रशासन सतर्क हुआ। बाकायदा पुलिस की मौजूदगी में मरीज को दून अस्पताल लाया गया।
शिकायत मिलने पर राजकीय दून मेडिकल अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना ने अस्पताल के एमएस डॉ. केके टम्टा, डिप्टी एमएस डॉ. एनएस खत्री, डॉ. केसी पंत, डॉ. अभय, डॉ सादिक और सीनियर फार्मासिस्ट सुधा कुकरेती आदि के साथ अस्पताल के कांफ्रेंस हॉल में मीटिंग की।
उन्होंने इमरजेंसी कक्ष की व्यवस्थाओं को सुधारने और दलालों पर अंकुश लगाने की बात कही। प्रिंसिपल ने बताया कि मरीजों को दून अस्पताल से बरगलाकर और जबरन निजी अस्पताल ले जाने वालेे दलालों को चिह्नित किया जा रहा है। उन्हें पकड़कर पुलिस के हवाले किया जाएगा।