पिथौरागढ़ के कवींद्र सिंह बिष्ट दीवाने तो फुटबॉल के थे, लेकिन मैदान में गेंद के पीछे दौड़ते-दौड़ते कब बॉक्सिंग के रिंग तक पहुंच गए पता नहीं चला।
बदल गई राह
कोच ने फुटबॉल मैदान में ही बॉक्सिंग ग्लब्ज पहनाए तो कवींद्र की राह ही बदल गई। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पहली बार शामिल हुए कवींद्र ने कोच के फैसले को न सिर्फ सही साबित किया, बल्कि इतिहास भी रच डाला।
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कवींद्र ने चैंपियनशिप में गढ़वाल विश्वविद्यालय को बालक वर्ग में पहली बार स्वर्ण पदक दिलाया और बेस्ट बॉक्सर भी चुने गए। बनारस में हुई चैंपियनशिप में डीएवी पीजी कॉलेज के बीए प्रथम वर्ष के छात्र कवींद्र (19) मूलत: पिथौरागढ़ के पंडा गांव निवासी हैं।
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कवींद्र ने 52 किलो वर्ग का स्वर्ण पदक जीता। मंगलवार को अमर उजाला से विशेष बातचीत में कवींद्र ने कामयाबी का श्रेय गुरु और कोच धरम चंद को दिया।
बताया कि उनके पिता धन सिंह बिष्ट आईटीबीपी में हैं और स्कीइंग खिलाड़ी हैं। लेकिन कवींद्र की पसंद फुटबाल थी। पंडा गांव में एक छोटे से मैदान में फुटबॉल खेलते थे।
बॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण
12 साल की उम्र में कोच धरम चंद ने पूछा बॉक्सिंग खेलोगे तो कवींद्र ने हामी भर दी। गुरुजी से बारीकियां सीखकर 2007 में पहले स्टेट सब-जूनियर बॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण जीता।
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2009 में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया काशीपुर सेंटर में बाक्सिंग का ट्रायल देने के बाद वहां दसवीं में प्रवेश लिया। साई से गुर सीखने के बाद कवींद्र ने एशियन चैंपियनशिप में भी प्रतिभाग किया।
नेशनल स्कूल और सुपर कप में भी वह तीन पदक जीत चुके हैं। कवींद्र अभी साई हॉस्टल काशीपुर में ही रह रहे हैं।
टीम के मैनेजर और डीबीएस कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर शिव कुमार अग्निहोत्री ने बताया कि बालक वर्ग में गढ़वाल विवि को कवींद्र की बदौलत पहला स्वर्ण पदक मिला है।
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इससे पहले टीम के खिलाड़ी कांस्य ही जीतते आ रहे थे। पिछले साल बालिका वर्ग में टीम ने सोना जीता था।