राजाजी नेशनल पार्क की चीला रेंज में स्थित विश्राम गृह में पानी के लिए तीन दिन तक बोरिंग तो हुई लेकिन पानी नहीं निकला। हां, विभाग के खाते से लाखों रुपये निकलकर कार्य करने वाली फर्म के पास जरूर चले गए। वर्ष 2011 के इस मामले में काम शुरू होने से पहले ही कार्य करने वाली फर्म को बाउचर से भुगतान करने वाले पार्क अधिकारियों को अब 12 लाख 90 रुपये का बिल नहीं मिल रहा है।
नहीं अपनाई गई प्रक्रिया
यही नहीं काम कराने के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई। आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार जैन द्वारा मांगी गई सूचना के बाद इसका खुलासा हुआ है।16 मार्च, 2011 को राजाजी नेशनल पार्क के तात्कालिक निदेशक एसएस रसाईली के आदेश पर चीला रेंज के अंतर्गत मिठ्ठावाली वन विश्राम भवन में सोलर वाटर पंपिंग सिस्टम लगाया जाना था।
इसके लिए तीन लाख 68 हजार पांच सौ की राशि स्वीकृत की गई। सोलर वाटर पंपिंग की बोरिंग के लिए चार लाख 51 हजार छह सौ 90 रुपये स्वीकृत हुए। कुल 820190 रुपये के काम के लिए दून की ऑक्स बाव-14 फर्म को 12,00,090 रुपये का भुगतान किया गया है। निदेशक का आदेश 16 तारीख का था, लेकिन संबंधित फर्म को भुगतान 5 मार्च से ही होना शुरू हो गया।
छुट्टी के दिन भी भुगतान
कार्य के लिए पार्क प्रशासन की ओर से पांच मार्च से 14 मार्च तक 4,51690 रुपये, जबकि 15 मार्च से 20 मार्च, 2011 तक 7,48,400 रुपये का भुगतान किया गया। पांच से 20 तारीख के बीच 12,00,090 का भुगतान किया गया। इनमें से तीन तिथियों में रविवार जबकि एक तिथि में होली का अवकाश था।
आयकर अधिनियम का उल्लंघन
आयकर अधिनियम 1961 40 ए (बी) के अनुसार किसी भी निर्माण कार्य के बाद संबंधित ठेकेदार को 20 हजार से अधिक का भुगतान नगद नहीं किया जा सकता। जबकि इस मामले में ठेकेदार को लाखों का भुगतान बाउचर के माध्यम से किया गया है।
शिकायत कइयों के पास, कार्रवाई नहीं
आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार जैन ने बताया कि उन्होंने संबंधित मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, मुख्य आयकर आयुक्त, प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव, प्रमुख वन संरक्षक, प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण और प्रमुख सचिव वित्त से की है। लेकिन अभी तक जांच के भी आदेश नहीं हुए।