राज्यसभा चुनाव के लिए मंगलवार को होने वाले नामांकन के दौरान पीडीएफ के रुख को देखकर भाजपा ने भी अपनी चाल बदल दी। वैसे तो भाजपा ने पहले ही एलान कर दिया था कि वह राज्यसभा चुनाव में अपना प्रत्याशी नहीं उतारेंगे, किसी निर्दलीय को समर्थन देने पर विचार किया जा सकता है।
पीडीएफ के रुख में बदलाव देखकर भाजपा ने अपनी चाल बदल दी। भाजपा ने अधिकृत तौर पर राज्यसभा के चुनाव में प्रत्याशी तो नहीं उतारा, लेकिन पार्टी के दो नेताओं का निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन करा दिया।
भाजपा के सभी विधायक थे मौजूद
नामांकन से पहले भाजपा के लगभग सभी विधायक विधानसभा पहुंच गए थे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने विधायकों के साथ मीटिंग भी की। दोपहर बाद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पार्टी की प्रदेश सचिव गीता ठाकुर द्वारा नामांकन दाखिल कराए जाने की बात सामने आई।
बाद में पार्टी के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष अनिल गोयल ने भी नामांकन दाखिल कर दिया। दोनों के प्रस्ताव भाजपा के विधायक ही थे। सूत्रों के मुताबिक माने तो दोनों में से एक का नाम वापस कराया जाएगा। सबसे बड़ा संकट यह होगा कि भाजपा के 27 विधायकों के अलावा 4-5 अन्य विधायकों का जुगाड़ कहां से होगा?
रावत पर लगाया काम करने का आरोप
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है कि हमने पहले सोचा था कि अगर पीडीएफ समर्थन मांगेगी तो हम उस पर विचार करेंगे, लेकिन पीडीएफ के विधायक तो अधिकारियों के तबादले से ही खुश हो गए।
हरीश रावत की सरकार दबाव में काम कर रही है। रावत अपनी कुर्सी बचाने के लिए कोई भी समझौता करने को तैयार हैं। भाजपा ने अधिकृत प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा है। निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं, हमारा व्यवहार उनसे एक जैसा होगा। दोनों में से अगर एक प्रत्याशी मैदान से हटता है तो यह फैसला उनको ही करना होगा