श्री नंदा देवी राजजात यात्रा में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चमोली जिला प्रशासन द्वारा लोहजंग, वाण और सुतोल में बायोमैट्रिक्स पंजीकरण करने की योजना बनाई गई है।
साथ ही यात्रा के दौरान सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए प्रशासन द्वारा यात्रा मार्ग को वायरलेस नेटवर्क से जोड़ दिया गया है। साथ ही सुतोल और वांण में सेटेलाइट दूरसंचार सेट स्थापित किए गए हैं।
जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने बताया कि यात्रा मार्ग पर आपत्तिकाल में सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को वाकीटॉकी और वायरलेस से लैस किया जाएगा जिससे किसी भी पेरशानी की सूचना का आसानी से आदान-प्रदान कर निराकरण किया जा सके।
इसके साथ ही तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए सुतोल और वाण में सेटेलाइट दूरसंचार सेवा की व्यवस्था की जा रही है।
यात्रा मार्ग के निर्जन पड़ावों पर मार्गों को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी निम को सौंपी गई है जिसके लिए शासन द्वारा संस्थान को 25 लाख की धनराशि अवमुक्त करा दी गई।
राजजात पर ट्रैक निम की टीम रवाना
रुद्रप्रयाग। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) उत्तरकाशी की टीम मजदूरों के साथ नंदा देवी राजजात ट्रैक पर रवाना हो गई है। दल में तीन डॉक्टरों सहित निम का मेडिकल स्टाफ भी शामिल है। निम की टीम वेदनी बुग्याल, भगूवासा, ज्यूरागली व शिला समुदर में कैंप करेगी।
केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य कर रही निम और एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) को प्रदेश शासन ने नंदा देवी राजजात ट्रैक का भी जिम्मा दे दिया है। निम को पैदल मार्ग सुधार, टेंटेज और सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है।
शनिवार को 100 मजदूरों सहित निम के 130 सदस्यीय दल वाण से अगले ठिकानों की ओर रवाना हुआ। टीम में डा. जेएस चौहान, डा. दिनेश और डा. राणा, सूबेदार तेजपाल, आमोद पंवार और शिवराज आदि शामिल हैं। एक एडवांस टीम शुक्रवार को ट्रैक पर रवाना हो गई थी।
वाण में निम ने बनाया बेस कैंप
18 अगस्त से शुरू हो रही यात्रा को देखते हुए निम ने वाण में बेस कैंप बना दिया है। इसकी जिम्मेदारी हवलदार रंजीत नेगी को दी गई है।
टीम को रूपकुंड से लगभग 500 मीटर आगे ज्यूरागली में रास्ते का निर्माण करना है। यहां अब तक रास्ता नहीं है। इसके अलावा टीम को डेंजर जोन का भी सुधार करना है।
हवलदार रंजीत नेगी ने बताया कि टीम ने वेदनी बुग्याल, भगूवासा, रूपकुंड व शिला समुदर में 200 टेंट लगाने हैं।
निम के प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल ने बताया कि घाट-सुतोल मोटर मार्ग की बुरी स्थिति के कारण जरुरी सामान वाण के रास्ते ले जाना पड़ रहा है।