सिफारिशों का राजस्व संहिता से भी होगा मिलान
हाल ही में राजस्व परिषद ने शासन को राजस्व संहिता की रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में भूमि से संबंधित अधिनियमों के बारे में विस्तृत ब्योरे हैं। इन अधिनियमों से समिति की सिफारिशों का मिलान होगा। शासन यह जांचेगा कि सिफारिशों और राजस्व संहिता में दर्ज अधिनियमों में किसी तरह का कोई विरोधाभास तो नहीं हैं।
जौनसार बावर और कूजा एक्ट की कसौटी पर परखेंगे
भू राजस्व समिति की सिफारिशों को सरकार जौनसार बावर जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम 1956 और कुमाऊं उत्तराखंड जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार कानून (कूजा एक्ट) की कसौटी पर भी परखा जाएगा।
निवेश प्रभावित नहीं होने देना चाहती सरकार
भू कानून समिति और राज्य सरकार का इस बात पर भी पूरा जोर है कि भू अधिनियम के प्रावधानों से राज्य में होने वाला औद्योगिक निवेश किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होना चाहिए। इसे ध्यान में रखकर ही समिति ने सिफा
रिशें की हैं और सरकार इसे ध्यान रखकर ही भू अधिनियम में नए संशोधनों को मंजूरी देगी।
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समिति की रिपोर्ट में जो आश्वासन व सिफारिशें प्राप्त हुई हैं उनका एक बार तुलनात्मक अध्ययन करना चाहते हैं। हाल ही में राजस्व संहिता की रिपोर्ट मिली है। राज्य में अलग-अलग क्षेत्रों के भू कानून भी मौजूद हैं। यह देखा जा रहा है कि सिफारिशों और मौजूद कानूनों के मध्य कोई विरोधाभास न रहे। इसके लिए दोनों आयुक्तों को पत्र भेज रहे हैं। शासन स्तर पर जो भू राजस्व कानून है, उसे लेकर भी किसी तरह की विधिक समस्याएं न हो, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।
- सचिन कुर्वे, सचिव (राजस्व)