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टिकट पक्का करने का ‘फॉर्मूला’ तो नहीं भीमलाल का अनशन 

Sun, 21 Aug 2016 04:43 PM IST
अरविंद सिंह / अमर उजाला, देहरादून
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भीमलाल आर्य से बात करतीं कांग्रेस विधायक ममता राकेश - फोटो : AmarUjala
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उत्तराखंड से घनसाली के पूर्व विधायक भीमलाल आर्य के सीएम आवास पर आमरण अनशन पर बैठने के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।
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उनके इस कदम को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस से ही जुड़े लोगों का मानना है कि पूर्व विधायक का आमरण अनशन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट पक्का करने की सोची समझी कवायद है। कारण, पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले दिनों साफ कर दिया है कि लोकसभा, विधानसभा समेत किसी भी चुनाव में टिकट महज उन्हीं लोगों को दिया जाएगा जो तीन साल से संगठन से विधिवत जुड़े हों।

राहुल के फरमान के बाद भाजपा समेत तमाम पार्टियों को छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वाले नेताओं का इस बात को डर सता रहा है कि कहीं ऐसा न हो इस फार्मूले के तहत उनका विधानसभा चुनाव में टिकट कट जाए।
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शायद पूर्व विधायक भीमलाल आर्य को भी इस बात का अहसास हो गया है कि विधानसभा चुनाव में उनका पत्ता साफ हो सकता है, तभी वह तमाम शर्तों के साथ यह शर्त भी लगा रहे हैं कि सीएम रावत उनसे वार्ता करने के साथ ही उनकी मुलाकात पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी करवाएं।

ताकि वह अपने मन की बात उनसे कह सकें। दूसरी ओर पार्टी प्रदेशाध्यक्ष किशोर उपाध्याय का कहना है कि पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से जो भी आदेश जारी किए गए हैं, उनका पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। फिर भी वह पार्टी के  उपाध्यक्ष हैं यदि वे चाहें तो इसमें शिथिलता दे सकते हैं। 
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केंद्रीय आलाकमान तक पहुंचा प्रकरण

भीमलाल आर्य - फोटो : AmarUjala
पूर्व विधायक आर्य के सीएम आवास पर अनशन पर बैठने का मामला केंद्रीय आलाकमान तक पहुंच गया है। प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी और सह प्रभारी संजय कपूर ने प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, सीएम हरीश रावत से वार्ता कर प्रकरण सुलझाने को कहा है।

केंद्रीय नेताओं को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं ऐसा न हो यह मामला और अधिक राजनीतिक तूल पकड़े और विपक्षी भाजपा इसका फायदा उठा ले। वहीं केंद्रीय आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद सीएम रावत ने देर शाम प्रदेश अध्यक्ष को वार्ता के लिए बुलाया। समाचार लिखे जाने तक वार्ता जारी थी।

भाजपा में लौटने का सवाल ही नहीं
पूर्व विधायक भीमलाल आर्य से यह पूछे जाने पर, कि क्या वह भाजपा में लौटने की सोच रहे हैं? इस पर उन्होंने कहा कि भाजपा में दोबारा जाने का सवाल ही नहीं उठता है।

जिस पार्टी ने उनका सदन के बाहर और भीतर दोनों जगह साथ न दिया हो, भला ऐसी पार्टी से दोबारा कैसे रिश्ता जोड़ा जा सकता है। दावे के साथ कहा कि भाजपा में जाने के बारे में वह सोच भी नहीं सकते हैं। 
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