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बारिश शुरू होते ही खौफजदा हो जाते हैं उत्तराखंड के 190 गांव

Sun, 21 Aug 2016 04:43 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, गढ़वाल
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landslide in uttarakhand - फोटो : AmarUjala
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उत्तराखंड के पहाड़ में 190 गांवों पर भूधंसाव की काली छाया मंडरा रही है। कई गांवों में स्थिति यह है कि हल्की बारिश से ही लोगों की रूह कांप जाती है और उन्हें परिवार सहित दूसरे स्थानों पर शरण लेनी पड़ती है।
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प्रशासन की ओर से हर बार ही गांव से लेकर ब्लाक और जिलास्तर पर संवेदनशील और अतिसंवेदनशील गांवों की सूची तैयार की जाती है, लेकिन उस पर कार्रवाई होने के बजाय वह फाइल शासन-प्रशासन में ही घूमती रहती है। 

टिहरी जिले के 58 गांव संवेदनशील
नई टिहरी जिले में आपदा एवं भूधंसाव के कारण नौ गांव अति संवेदनशील और 49 गांव संवेदनशील की श्रेणी में रखे गए हैं, लेकिन वर्षों बाद भी प्रभावित गांव के पुनर्वास को लेकर ठोस पहल नहीं हुई है। 
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टिहरी जिले में नरेंद्रनगर तहसील के डौर, टिहरी के पनेथ, देवप्रयाग के धर्मपुर, त्यालनी मध्ये खलुड़ा, मरोड़ा, सौडू हिंसरियाखाल, घनसाली के इंद्रोला, अगुंड़ा, प्रतापनगर के भेलुंता गांव को आपदा की दृष्टि अति संवेदनशील घोषित किया गया है। प्रतापनगर तहसील के 5, नरेंद्रनगर 4, कंडीसौड़ 3, धनोल्टी 6, नैनबाग 1, घनसाली में 30 गांव संवेदनशील घोषित हैं। 
डीएम इंदुधर बौड़ाई का कहना है कि चिह्नित गांव के पुनर्वास के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन पुनर्वास करने के संबंध में शासन से दिशा-निर्देश जारी नहीं हो पाए हैं। लिहाजा प्रशासन की ओर से बारिश के दिनों में प्रभावितों को ऐतिहातन सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कराया जाता है।

उत्तरकाशी में 26 गांवों का होना है पुनर्वास
आपदाओं से संकटग्रस्त 55 गांव में जहां पहले चरण में 11 गांव ही अत्यधिक संवेदनशील के रूप में पुनर्वास के लिए चिह्नित थे। इस वर्ष इसमें 15 गांव और जुड़ गए है। भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने के बाद भी पुनर्वास का मामला सरकारी सुस्ती और नियम प्रक्रियाओं में उलझ कर रह गया है।

आपदा में तबाह जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 296 परिवारों को केंद्र तथा राज्य के बजट से घर जरूर बना कर दिए जा चुके हैं। भटवाड़ी के हुर्री, बार्सू, पिलंग जौडाऊ, क्यार्क और असी गंगा घाटी के अत्यधिक संवेदनशील गांव के अलावा जिले में 15 और गांव इस वर्ष ही आपदा से पुनर्वास की पहली वरीयता में सूचीबद्ध करने के लिए इनके पुन: भूगर्भीय सर्वेक्षण के लिए पत्र व्यवहार शुरू किया जा रहा है।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल का कहना है कि नए शामिल हुए गांवों का भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए शासन से पत्र व्यवहार चल रहा है। सर्वे के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 
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चमोली में 78 गांव विस्थापन की सूची में शामिल 

एच पर ‌गिरे बड़े पत्थर। - फोटो : अमर उजाला
चमोली जनपद में 78 गांव विस्थापन की सूची में दर्ज हैं। बीती दिसंबर में जिला प्रशासन की ओर से गैरसैंण तहसील के फरकंडे गांव को विस्थापित किया गया था, जबकि ग्राम पंचायत छिनका के 40 परिवार, पुलना, भ्यूंडार, पांडुकेश्वर और अरुड़ी-पटूड़ी गांवों के आपदा प्रभावित परिवारों को लाभार्थी संचालित भवन निर्माण कार्यक्रम के तहत पुनर्वासित किया गया। जिला प्रशासन ने गणांई, भ्याड़ी, छपाली, त्यूला, छिनका, कनोल, सरतोली, बौंला, दाडमी और पैंया चौरमी गांव को विस्थापन की शीघ्र श्रेणी में रखा है। इन दिनों इन दस गांवों के विस्थापन की कार्ययोजना गतिमान है।

शासन में लटकी विस्थापन की फाइल
पौड़ी जनपद में कोटद्वार, पौड़ी, यमकेश्वर ब्लाक में 216 परिवारों की विस्थापन की फाइलें शासन स्तर पर लटकी हैं। आपदा कंट्रोल रूम में दर्ज इनके आवेदन के बाद भू वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट तैयार की थी। करीब छह माह पूर्व इनके आवेदनों को शासन को भेज दिया गया। कोटद्वार के पुलिंडा गांव के 128, केष्टा के तोक दाउ हिंदानू गांव के 17, बड़रौ के चार, पौड़ी के बंतापाणी तोक के छह और यमकेश्वर ब्लाक के कसाण गांव के 61 परिवार विस्थापन की राह देख रहे हैं।

सर्वे तक सिमटी शासन-प्रशासन की कार्रवाई
रुद्रप्रयाग में आपदा प्रभावित जनपद के 23 गांवों के 472 परिवारों पुनर्वास की राह ताक रहे हैं। पिछले तीन वर्ष से भू-गर्भीय सर्वेक्षण और फाइल रुद्रप्रयाग से देहरादून और राजधानी से जिले में घूमने से अधिक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। पिछले चार दशक से क्षेत्र के कई गांव भूस्खलन व भू-धंसाव से जिले में कई गांव प्रभावित हुए हैं।

जून 2013 के बाद भू-गर्भ विशेषज्ञों के निरीक्षण और सर्वेक्षण के बाद प्रशासन की ओर से राजस्व विभाग व अन्य विभागों के साथ तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर विस्थापन के लिए रुद्रप्रयाग, ऊखीमठ और जखोली तहसील में 23 गांव के 472 परिवार चयनित किए गए।

इन विस्थापित होने वाले परिवारों में 61 को राज्य सरकार की ओर से चयनित 46 नाली भूमि पर बसाया जाना है, लेकिन पिछले तीन वर्ष से जिले में सिर्फ पांजणा, सेमी तल्ली, कुणजेठी, कविल्ठा और जालतल्ला गांव का भू-सर्वेक्षण हो पाया है। 

रुद्रप्रयाग में इन गांवों का होना है विस्थापन 
पांजणा, जैली, मूसाढूंग (सुनाई तोक), कालीमठ, कुणजेठी, जागतल्ला, बलसुण्डी, बीरोंदेवल खालीतोक, सेमी तल्ली  दैड़ा, सिल्लाबमणगांव, चमराड़ा, गिरिया, कविल्ठा, ऊखीमठ, नागजई (जाख तोक), टेमरियावल् ला, दिलमी, टाटलग्गा फेगू, डमार, मलाऊं, कुंडा दानकोट (धोकाणी तोक) और छांतीखाल। 
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