उत्तराखंड के पहाड़ में 190 गांवों पर भूधंसाव की काली छाया मंडरा रही है। कई गांवों में स्थिति यह है कि हल्की बारिश से ही लोगों की रूह कांप जाती है और उन्हें परिवार सहित दूसरे स्थानों पर शरण लेनी पड़ती है।
प्रशासन की ओर से हर बार ही गांव से लेकर ब्लाक और जिलास्तर पर संवेदनशील और अतिसंवेदनशील गांवों की सूची तैयार की जाती है, लेकिन उस पर कार्रवाई होने के बजाय वह फाइल शासन-प्रशासन में ही घूमती रहती है।
टिहरी जिले के 58 गांव संवेदनशील
नई टिहरी जिले में आपदा एवं भूधंसाव के कारण नौ गांव अति संवेदनशील और 49 गांव संवेदनशील की श्रेणी में रखे गए हैं, लेकिन वर्षों बाद भी प्रभावित गांव के पुनर्वास को लेकर ठोस पहल नहीं हुई है।
टिहरी जिले में नरेंद्रनगर तहसील के डौर, टिहरी के पनेथ, देवप्रयाग के धर्मपुर, त्यालनी मध्ये खलुड़ा, मरोड़ा, सौडू हिंसरियाखाल, घनसाली के इंद्रोला, अगुंड़ा, प्रतापनगर के भेलुंता गांव को आपदा की दृष्टि अति संवेदनशील घोषित किया गया है। प्रतापनगर तहसील के 5, नरेंद्रनगर 4, कंडीसौड़ 3, धनोल्टी 6, नैनबाग 1, घनसाली में 30 गांव संवेदनशील घोषित हैं।
डीएम इंदुधर बौड़ाई का कहना है कि चिह्नित गांव के पुनर्वास के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन पुनर्वास करने के संबंध में शासन से दिशा-निर्देश जारी नहीं हो पाए हैं। लिहाजा प्रशासन की ओर से बारिश के दिनों में प्रभावितों को ऐतिहातन सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कराया जाता है।
उत्तरकाशी में 26 गांवों का होना है पुनर्वास
आपदाओं से संकटग्रस्त 55 गांव में जहां पहले चरण में 11 गांव ही अत्यधिक संवेदनशील के रूप में पुनर्वास के लिए चिह्नित थे। इस वर्ष इसमें 15 गांव और जुड़ गए है। भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने के बाद भी पुनर्वास का मामला सरकारी सुस्ती और नियम प्रक्रियाओं में उलझ कर रह गया है।
आपदा में तबाह जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 296 परिवारों को केंद्र तथा राज्य के बजट से घर जरूर बना कर दिए जा चुके हैं। भटवाड़ी के हुर्री, बार्सू, पिलंग जौडाऊ, क्यार्क और असी गंगा घाटी के अत्यधिक संवेदनशील गांव के अलावा जिले में 15 और गांव इस वर्ष ही आपदा से पुनर्वास की पहली वरीयता में सूचीबद्ध करने के लिए इनके पुन: भूगर्भीय सर्वेक्षण के लिए पत्र व्यवहार शुरू किया जा रहा है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल का कहना है कि नए शामिल हुए गांवों का भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए शासन से पत्र व्यवहार चल रहा है। सर्वे के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।