फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उपचुनावः पर्चा भरने से पहले ‘प्रत्याशी’ को राज्यमंत्री का दर्जा

Tue, 24 Mar 2015 09:05 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
सुरेंद्र राकेश के निधन से खाली हुई भगवानपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर सोमवार को सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई।
विज्ञापन


इस सीट के लिए नामांकन प्रक्रिया के बीच खासकर कांग्रेस में स्थितियां उलझती-सुलझती रहीं। हरीश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सुरेंद्र राकेश की पत्नी ममता राकेश को कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चाओं के बीच पार्टी के नेता मास्टर सतपाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर नामांकन दाखिल किया।

कांग्रेस उम्मीदवार का मसला फिर उलझा
इस बीच ममता ने कहा कि कांग्रेस उन्हें टिकट देती है तो वह चुनाव लड़ेंगी। शाम होते-होते सूचना आई कि सुरेंद्र राकेश के चाचा व निर्दलीय पर्चा भर चुके मास्टर सतपाल और ममता राकेश को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया गया है। ऐसे में एक बार फिर कांग्रेस उम्मीदवार का मसला उलझ गया।
विज्ञापन


कयास लगाया जाने लगा कि कांग्रेस उम्मीदवार कोई तीसरा होगा। हालांकि कुछ देर बाद ही कांग्रेस के प्रदेश सह प्रभारी संजय कपूर ने कहा कि ममता राकेश के नाम पर पार्टी में सहमति बन गई है। वह मंगलवार को नामांकन करेंगी। हालांकि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने इसकी पुष्टि नहीं की।

वैसे, स्थानीय कांग्रेस नेता भी शुरुआत से ही कह रहे थे कि ममता राकेश और मास्टर सतपाल दोनों से नामांकन करवाया जाएगा। मालूम हो कि कांग्रेस के करीबी सुरेंद्र राकेश बसपा से निलंबित थे। मास्टर सतपाल 2012 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सुरेंद्र राकेश के खिलाफ चुनाव लड़े थे।

सुरेंद्र राकेश के भाई सुबोध राकेश भी यहां से टिकट के दावेदार हैं। संजय कपूर के दावे के बावजूद कांग्रेस के कुछ सूत्र दावा कर रहे हैं कि सतपाल और ममता को पद देकर मनाने की कोशिश की गई है, ताकि सुबोध को टिकट दिए जाने की स्थिति में हंगामा न हो। बहरहाल, बसपा यहां से उम्मीदवार नहीं उतारेगी।

भाजपा ने यहां से अपना उम्मीदवार तय कर लिया है। पार्टी ने रुड़की भाजपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह को इस सुरक्षित सीट से प्रत्याशी बनाया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने कहा कि राजपाल मंगलवार को नामांकन दाखिल करेंगे। 24 मार्च नामांकन का आखिरी दिन है। मतदान 11 अप्रैल को होगा।

भाजपा करेगी चुनाव आयोग से शिकायत
भगवानपुर में उम्मीदवार तय करने की सियासी सरगर्मी के बीच सोमवार को दिवंगत सुरेंद्र राकेश के दो परिजनों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया।

मुख्य सचिव एन रविशंकर की ओर से जारी आदेश के मुताबिक सुरेंद्र राकेश की पत्नी ममता राकेश को राज्य महिला कल्याण परिषद की उपाध्यक्ष और मास्टर सतपाल को राज्य समाज कल्याण परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया है। उनके उपाध्यक्ष पद पर रहने तक राज्यमंत्री दर्जा बरकरार रहेगा।

भाजपा चुनाव प्रक्रिया के बीच भगवानपुर निर्वाचन क्षेत्र से ही दो-दो राज्यमंत्री बनाए जाने को आचार संहिता का उल्लंघन मान रही है। पार्टी नेता प्रकाश सुमन ध्यानी के मुताबिक भाजपा इस मामले की शिकायत चुनाव आयोग से करेगी।

झगड़ा खत्म होगा या बढ़ेगा?
दिल्ली और दून के बीच की दूरी पाटने में कांग्रेस की एक और असफलता सोमवार को सामने आई। स्थानीय स्तर पर टिकट विवाद को सुलझाने की कोशिश की गई, पर उसका दिल्ली से तालमेल नहीं बन पाया। ऐसे में आचार संहिता के उल्लंघन का खतरा उठाकर दो को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया, लेकिन यह अस्त्र भी खास काम करता नहीं दिख रहा।

भगवानपुर सीट पर कांग्रेस में दून और दिल्ली के बीच का अंतर साफ नजर आया। कांग्रेस आलाकमान ममता राकेश का नाम तय किए बैठा है दूसरी ओर प्रदेश में कांग्रेस ने ममता राकेश को ही राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया। सूत्रों के मुताबिक एक साथ कई स्तर पर मैनेजमेंट की कोशिशों के चलते यह उलझन सामने आ रही है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने तरह से मामले को सुलझाने की कोशिश में है। कहा जा रहा है कि दिवंगत सुरेंद्र राकेश के भाई सुबोध राकेश कांग्रेस से टिकट न मिलने की स्थिति में निर्दलीय लड़ने की धमकी दे रहे हैं।

दिल्ली का मास्टर प्लान कुछ और ही नजर आ रहा है। सुबोध राकेश की धमकी की बात अगर सही है तो कांग्रेस की ओर से सुबोध राकेश को ही शांत करने की कोशिश होनी चाहिए थी। लेकिन राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया ममता राकेश को और प्रदेश सह प्रभारी का कहना है कि ममता राकेश का ही नामांकन होगा। तो फिर सुबोध राकेश पर स्थिति उलझन वाली बनी रह गई।

उधर, पूर्व में कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ चुके मास्टर सतपाल भी अपना दावा मजबूत मान रहे हैं। मास्टर सतपाल ने राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद भी टिकट से आस नहीं छोड़ी है। ऐसे में इस बात के भी संकेत हैं कि कांग्रेस में टिकट का झगड़ा नाम वापसी तक कायम रह सकता है।
विज्ञापन


कहा जा रहा है कि मास्टर सतपाल नामवापस नहीं लेते तो भी पूर्व मंत्री सुरेंद्र राकेश के परिवार का एक अन्य सदस्य मैदान में दिखेगा ही। ऐसे में परिवार को चुनाव के हिसाब से बंटने न देने की कांग्रेस की कोशिश भी धरी रह जाएगी। पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि राज्यमंत्री का दर्जा वापस हो सकता है तो फिर ममता राकेश प्रत्याशी और सुबोध राकेश को दर्जे से नवाजा जा सकता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें