भाजपा के पीएम इन वेटिंग नरेंद्र मोदी की रैली के लिए देहरादून में चौकसी काफी बढ़ा दी गई है।
अब तक की ऐतिहासिक रैली
भिखारियों को हटाकर शहर की सीमा से बाहर कर दिया गया है, जबकि साधुओं को हरिद्वार को रवाना कर दिया गया है। दून में होने वाली जनसभा सुरक्षा के लिहाज से अब तक की ऐतिहासिक रैली साबित होगी।
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देश की यह पहली ऐसी रैली होगी जिसमें कई राज्यों की पुलिस के साथ ही सुरक्षा के लिए सैन्य उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। जमीन के भीतर की थाह हिमालयन भूविज्ञान संस्थान के उपकरण लेंगे, जबकि आसमानी पहरा सेटेलाइट से होगा।
ऊंची इमारतों और पेड़ों की बीच छिपे स्नाइफर की तेज निगाहें ग्राउंड की हर गतिविधियों पर नजर रखेंगी।
हर हमले के लिए तैयार क्यूआरटी
उत्तराखंड की क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) वैसे तो राज्य का कमांडो दस्ता है लेकिन नरेंद्र मोदी की रैली के लिए उसे पहली बार विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।
गुरुवार को टीम एएसपी मणिकांत मिश्रा के नेतृत्व में आनारवाला स्थित आर्मी फायरिंग रेंज पहुंची। टीम के सदस्यों को पहली बार एक साथ तीन तरह का प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें ट्रेंड किया गया कि अगर हमला पास से होता है तो कैसे रिस्पांस करना है।
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दूर से होता है तो कैसे और अन्य परिस्थितियों में हमले के दौरान कैसे और कब क्या करना है। उन्हें एके-47, एसएलआर, कारबाइन और इंसास राइफल का सिंगल और बर्स्ट फायर प्रशिक्षण भी दिया गया। यह प्रशिक्षण दिन भर चला।
एएसपी मिश्रा ने बताया इस दस्ते के पास भी मुख्य जिम्मेदारी होगी। कुछ भी अप्रिय होते ही यह दस्ता हमला बोल देगा। वहीं एसएसपी केवल खुराना ने बताया कि गुलदार टीम को भी मैदान में उतारा गया है।
गुलदार टीम की कमान वैसे इंटेलिजेंस के पास है लेकिन रैली के मद्देनजर उसे भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। गुलदार के पास ऐसे कामों की जिम्मेदारी निभाने का विशेष प्रशिक्षण होता है।
पंजाब से आए ‘एनएलजेडी’ और ‘एचएचएमडी’
परेड ग्राउंड की सुरक्षा में 35 नॉन लीनियर जंक्शन डिटेक्टर (एनएलजेडी) और 200 हेंड हेल्ड मेटल डिडेक्टर लगाए जाएंगे। दोनों ही उपकरण पंजाब पुलिस से लिए गए हैं।
यह दोनों ही उपकरण मेटल के साथ प्लास्टिक से बने घातक चीजों तक को पकड़ लेते हैं। वहीं डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (डीएफएमडी) भी लगाए जा रहे हैं। इनकी संख्या लगभग पचास के करीब होगी।
जीपीआर से ली 20 मीटर नीचे तक टोह
वाडिया से आई टीम ने गुरुवार को भी परेड ग्राउंड का निरीक्षण किया। टीम ने जीपीआर तकनीक के जरिये ग्राउंड के नीचे बीस मीटर तक टोह ली।
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एसएसपी केवल खुराना ने बताया बम डिस्पोजल दस्ते के साथ ही डॉग स्कवॉयड लगातार निगरानी पर रहेगा। सुरक्षा में कोई चूक न रहे इसलिए वह खुद ग्राउंड पर बराबर नजर रख रहे हैं।
चार सौ मीटर तक नहीं करेंगे मोबाइल काम
परेड ग्राउंड के आसपास चार सौ मीटर तक रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों को रैली के दौरान खासी दिक्कत होगी। क्योंकि पूरे दिन उनके मोबाइल में सिग्नल नहीं होंगे।
पुलिस ने दो स्ट्रेटिजिक जैमर ग्राउंड के अंदर लगाए हैं। यह जैमर दो सौ मीटर रेडियस तक सभी मोबाइल फोन को जाम कर देगा। वहीं दो मोबाइल जैमर ग्राउंड के चारों ओर घूमते रहेंगे।