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अरे, ये रिक्शा किसका है भाई...?

Tue, 20 May 2014 05:07 PM IST
मनमीत रावत / अमर उजाला, देहरादून
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राजधानी देहरादून की सड़कों पर 100 से अधिक बैटरी संचालित रिक्शे दौड़ रहे हैं। लेकिन ये रिक्शे किसके हैं?
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इको फ्रेंडली रिक्शों की सवारी है अवैध
यह सवाल इसलिए क्योंकि बैटरी चालित रिक्शों का पंजीकरण न तो नगर निगम कर रहा है न ही परिवहन विभाग। बेशक यह रिक्शे लोगों को आटो टैक्सी के महंगे किराये से राहत दे रहे हैं लेकिन इन इको फ्रेंडली रिक्शों की सवारी है अवैध।

नगर निगम के पास बैटरी चालित रिक्शों का कोई रिकार्ड नहीं है, क्योंकि वह इनका पंजीकरण नहीं कर रहा है। इसी तरह परिवहन विभाग भी इनके पंजीकरण से हाथ झाड़ रहा है।
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सवाल यह है कि इन रिक्शों पर नजर रखने का जिम्मा कौन लेगा? बिना कहीं पंजीकरण वाले रिक्शे से यदि कोई हादसा हो जाए तो इसकी सवारियां इंश्योरेंस की हकदार नहीं होंगी। पुलिस भी मामले में कार्रवाई नहीं कर सकेगी।

रिक्शों के पंजीकरण पर देश भर में विवाद
बैटरी चालित रिक्शे का विवाद दून में ही नहीं, पूरे देश में है। दरअसल, रिक्शे की खरीदारी पर न तो कोई कागज मिलता है, न ही इंश्योरेंस होता है। इको फ्रेंडली होने से टैक्स भी नहीं लगता।

दो सौ वाट से अधिक क्षमता की बैटरी के कारण नगर निगम इन्हें सामान्य रिक्शा के तौर पर पंजीकृत नहीं कर सकता। जबकि परिवहन विभाग कागजों के अभाव में इनको रजिस्टर्ड नहीं कर पाता।

दिल्ली परिवहन विभाग ने भी कुछ दिन पूर्व इस मसले पर बैठक की थी, लेकिन कोई हल नहीं निकला। गुड़गांव में बनने वाले इन रिक्शों की मांग बढ़ रही है। टैक्स फ्री और पंजीकरण न होने से बेरोजगार इन्हें हाथों हाथ ले रहे हैं।

दून में रिक्शों की बढ़ती मांग के मद्देनजर सुद्धोवाला में शोरूम खुल गया है।

सुरक्षा के लिए भी खतरा
बम धमाकों में आतंकी साइकिलों का प्रयोग करते रहे हैं, क्योंकि इनका पंजीकरण नहीं होता। इस वजह से आतंकी तक पहुंचना मुश्किल होता है।

कुछ समय पूर्व राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी और आईबी ने राज्यों को बिना पंजीकृत वाहनों का शहरों में संचालन रोकने की हिदायत दी थी। ऐसे में बिना पंजीकरण ये रिक्शे सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकते हैं।

..लेकिन सवारी है बेहतरीन
पंजीकरण हो जाए तो बैटरी चालित रिक्शे शहर के भीतरी इलाकों के लिए बेहतरीन साबित हो रहे हैं। खास करके देहरादून के लिए, क्योंकि यहां पर हाथ वाले रिक्शे नहीं चलते हैं।

ऐसे में लोगों को थोड़ी दूर चलने के लिए यदि निजी वाहन नहीं है तो पैदल चलना पड़ता है। पर्यावरण के लिहाज से भी बैटरी चालित रिक्शे अच्छे हैं। विक्रम-आटो के मुकाबले इनका किराया भी कम होता है।
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बैटरी चालित रिक्शों का मामला संज्ञान में है। परिवहन विभाग इनका पंजीकरण नहीं कर पा रहा है तो नगर निगम की बोर्ड बैठक में इनके लिए बायलॉज लाने पर विचार चल रहा है। अब तक दून में रिक्शा नहीं चलते थे, इसलिए बायलॉज नहीं थे।
- विनोद चमोली, मेयर
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