राजपुर रोड स्थित एश्ले हॉल के समीप बैंक कर्मियों के प्रदर्शन के दौरान संबोधन देते पदाधिकारी।संव
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देश के सरकारी बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ नौ बैंक संगठनों के महासंघ युनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके अलावा सरकार के खिलाफ बैंककर्मियों ने दो दिन हड़ताल करने का भी फैसला लिया। बैंककर्मियों ने कहा कि शीतकालीन सत्र में बैंकिंग अधिनियमों में परिवर्तन कर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण करने की सरकार की मंशा का हम सख्त विरोध करते हैं।
बुधवार को एस्लेहाल स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सामने बैंककर्मियों ने कामकाज के बाद सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। बैंककर्मियों ने कहा कि बैंकों का निजीकरण होने से बैंककर्मियों के साथ ही लोगों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। यूएफबीयू के संयोजक समदर्शी बड़थ्वाल ने कहा कि बैंकों का निजीकरण कर सरकार कॉर्पोरेट पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती हैं। इसके विरोध में 16-17 दिसंबर को बैंककर्मी हड़ताल पर रहेंगे। वक्ताओं ने कहा कि सरकारी बैंक आम नागरिकों को सस्ती बैंकिंग सेवा उपलब्ध कराते हैं। लेकिन इन बैंकों का निजीकरण होने से जहां एक ओर लोगों को महंगी बैंकिंग सेवाएं मिलेगी उसके साथ ही इसका रोजगार पर भी बुरा असर पड़ेगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने फरवरी में पेश केंद्रीय बजट में घोषणा की थी कि दो सरकारी बैंकों का निजीकरण किया जाएगा। सरकार अपने विनिवेश कार्यक्रम के तहत यह निजीकरण करने जा रही है। बीते चार सालों में 14 सरकारी बैंकों का विलय भी किया जा चुका है। प्रदर्शन करने वालों में आरके गैरोला, राजन पुंडीर, गोपाल तोमर, टीपी शर्मा, निशांत शर्मा, मोहित वर्मा, एसएस रजवार, विनय शर्मा, डीएन उनियाल, करन रावत, ओपी मौर्या, सुुधीर रावत, नवीन नेगी आदि मौजूद रहे।