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बैंक वसूलें चार्ज पूरा, एसएमएस अलर्ट भेजें अधूरा

Tue, 14 Jan 2014 04:16 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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अगर आप बैंकों के ‘विशेष’ ग्राहक नहीं, करेंट एकाउंट होल्डर नहीं तो निश्चित रूप से आप उनके लिए कोई ज्यादा मायने नहीं रखते। एक एसएमएस अलर्ट ही आपको यह अहसास करा सकता है।
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सुविधा के लिए वसूली
चेक बाउंस हो जाने, कार्ड फंसने की स्थिति में चार्ज कट जाने जैसी सूचनाओं का अलर्ट ग्राहकों तक नहीं पहुंच पा रहा। वह भी तब, जबकि एक निश्चित धनराशि इस सुविधा के लिए उनसे वसूली जा रही है।

यह बात दीगर है कि विशेष यानी प्रिविलेज्ड ग्राहकों को रिलेशनशिप मैनेजर की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। करेंट एकाउंट होल्डरों को भी दुधारू गाय मानते हुए उनका खास ध्यान रखा जा रहा है।
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ऐसे में खाते में कम राशि रखने वाले या जीरो बैलेंस खाताधारक मुसीबत झेलने पर मजबूर हैं।

बैंकों के सर्वर से भी हो रही दिक्कत
कई बैंकों में नेट बैंकिंग, एटीएम, कोर बैंकिंग साल्यूशन के लिए एक ही सर्वर प्रयोग किया जा रहा है। लोड बढ़ने की स्थिति में कई बार या तो यह स्लो हो जाता है या बैठ जाता है, लिहाजा एसएमएस अलर्ट नहीं पहुंच पाता।

इसे देखते हुए कुछ बैंकों ने अपने यहां सर्वर की संख्या बढ़ा दी है, ताकि ग्राहकों को दिक्कत का सामना न करना पड़े।

वास्तविक प्रयोग के लिए चार्ज की थी बात
सभी बैंकों को बीती छह दिसंबर को रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) के प्रिंसिपल सीजीएम एके बेरा की तरफ से पत्र भेजे गए थे। इसमें उन्हें सलाह दी गई थी कि वह ग्राहकों को एसएमएस अलर्ट के वास्तविक प्रयोग के लिए चार्ज करें।

चार्ज के औचित्य और बैंकों की तरफ से एसएमएस भेजे जाने के लिए ग्राहकों से वसूले जाने वाले चार्ज में एकरूपता लाने के लिए सही टेकभनोलाजी और टेलीकाम सर्विस प्रोवाइडर की व्यवस्था करने को भी कहा था।

ऑन लाइन अलर्ट को सिस्टम भी नहीं बना
इसके अलावा ‘रिपोर्ट ऑफ द वर्किंग ग्रुप टू फार्मूलेट ए स्कीम फोर इन्श्योरिंग रीजनेबलनेस आफ बैंक चार्जेज’ का हवाला दे हुए राशि और कार्डों के विभिन्न चैनलों पर प्रयोग को ध्यान में न रखते हुए, सभी तरह के लेन-देन से जुड़े आन लाइन अलर्ट के लिए एक सिस्टम बनाने की बात कही थी पर अभी तक यह सब हवा में है।

चेक क्लियरिंग हाउस में लगाने से पहले अलर्ट की सुविधा नहीं होती थी, लेकिन अब काफी समय से यह सुविधा है। कई जगह सर्वर दिक्कत करता था, लिहाजा इनकी संख्या बढ़ाई गई है। अलर्ट न पहुंचना तकनीकी खामी हो सकती है।
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- रमेश कुमार, प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई)
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