देहरादून में बैंकों की हड़ताल से भले हजार करोड़ रुपए का लेन-देन प्रभावित हुआ, लेकिन लगभग सवा 2 करोड़ सरकार के बचे भी।
एक दिन की तनख्वाह हाथ से जानी तय
इन अफसरों की हड़ताल पर ‘नो वर्क, नो पे’ लागू है, लिहाजा एक दिन की तनख्वाह उनके हाथ से जानी तय है। इसका सीधा-सा गणित देखें। बैंक अधिकारियों एक दिन का न्यूनतम वेतन 1500 रुपए के आस-पास पड़ता है।
ऐसे में 15 हजार कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से एक दिन में सरकार को करोड़ों की बचत है। जानकार बताते हैं कि हड़ताल के दौरान प्रभावित होने वाले लेन-देन से बैंक को जितने कमीशन की हानि होती है, उससे ज्यादा कमाई सरकार की अफसरों की हड़ताल से हो जाती है।
हड़ताल का आह्वान करने वाली यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के संयोजक जगमोहन मेहंदीरत्ता बताते हैं कि यह 15 हजार कर्मियों की हड़ताल का आंकड़ा केवल उत्तराखंड का है। अपना प्रदेश नॉर्थ जोन में है।
अगर नॉर्थ जोन में उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों मसलन, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल आदि सब को शामिल कर लिया जाए तो यह सरकार की बहुत बड़ी ‘बचत’ है।
एक हजार करोड़ का लेन-देन प्रभावित
बैंकों पर बुधवार को पड़े ताले से प्रदेश भर में तकरीबन एक हजार करोड़ रुपए का लेन-देन प्रभावित हुआ। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) की तरफ से वेतन संशोधन के लिए की गई इस हड़ताल में 26 सरकारी समेत तीन निजी बैंक कर्नाटक, फेडरल, नैनीताल बैंक भी शामिल रहे।
चेक जमा कराने, ड्राफ्ट बनवाई जैसे काम नहीं हुए। नेफ्ट, आरटीजीएस सब कुछ ठप रहा। उत्तराखंड में विभिन्न बैंकों की 2 हजार शाखाओं के 15 हजार कर्मी हड़ताल में शामिल हुए।
संयोजक जगमोहन मेहंदीरत्ता के अनुसार बीती 10 नवंबर को केंद्र संग 14वीं बैठक बेनतीजा रही है। केंद्र से 25 फीसदी बढ़ोत्तरी की मांग की जा रही है, जबकि सरकार साढ़े 11 प्रतिशत से आगे बढ़ने को राजी नहीं हो रही।
बैंकों के लगातार बढ़ रहे एनपीए को भी उन्होंने मुद्दा बनाया। साथ ही सरकारी बैंकों खाली पड़े प्रमुख पदों पर भी भर्ती की मांग दोहराई।
एटीएम चले पर कई जगह नगदी नहीं
हड़ताल के दौरान एटीएम तो चले, लेकिन नगदी निकासी में कई स्थानों पर दिक्कत रही। पटेलनगर यूनियन बैंक से पैसे नहीं निकले, वहां से केवल पर्ची बाहर आती रही। सहारनपुर रोड स्थित बैंक आफ बड़ौदा का भी यही हाल रहा।
परेड ग्राउंड से जुलूस, धारा चौकी से लौटे
वेतन बढ़ोत्तरी पर केंद्र की उदासीनता से आजिज बैंक अधिकारियों, कर्मियों ने बुधवार को परेड ग्राउंड स्थित बिजली दफ्तर से जुलूस निकाला। नारेबाजी के बीच यह जुलूस एस्लेहाल, राजपुर रोड धारा चौकी पहुंचा तथा यहां से वापस परेड ग्राउंड पहुंचकर संपन्न हुआ।
इस बीच धारा चौकी पर पुलिस, प्रशासन के अफसरों से भी बैंक वालों की नोक-झोंक हुई। जुलूस को घंटाघर से घूमकर वापस आना था, लेकिन जुलूस की पूर्व अनुमति न होने की वजह से उन्हें धारा चौकी से लौटना पड़ा। इससे पूर्व सभा में वक्ताओं ने मांगें भी उठाईं।
इनमें यूएफबीयू के संयोजक जगमोहन मेहंदीरत्ता, हरिओम नारंग, वीके जोशी, सुरेश उपाध्याय, पीआर कुकरेती, आरके गैरोला, समदर्शी बड़थ्वाल, विनय कुमार, राजेश सिंघल, वीकेगुप्ता, राजीव शाह आदि शामिल रहे।