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बदरीनाथ हाईवे हुआ खतरनाक, गंगोत्री में भी डेंजर जोन

Sat, 05 Jul 2014 10:49 AM IST
अमर उजाला, गोपेश्वर, उत्तरकाशी
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उत्तराखंड में शुक्रवार को चमोली जिले के विभिन्न हिस्सों में मूसलाधार बारिश से लामबगड़, जेपी बैराज और बैनाकुली के पास बदहाल बदरीनाथ राजमार्ग खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है।
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लामबगड़ गदेरे में पानी फिर बढ़ गया है। हालांकि यहां सड़क बहने के बाद पत्थर भरकर और पहाड़ी काटकर बनाई गई कामचलाऊ व्यवस्था अब भी कायम है। आसपास दलदल जैसी स्थिति पैदा हो गई।

शुक्रवार सुबह 430 तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम पहुंचे। लेकिन बारिश के बाद लामबगड़ क्षेत्र में हाईवे की खराब स्थिति को देखते हुए कई तीर्थयात्रियों ने यात्रा कार्यक्रम बदलकर बदरीनाथ धाम में ही रुकने का निर्णय लिया।
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बारिश होने पर नहीं जा सकेंगे यात्री

अपने परिवार के साथ बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा कर लौटे दिल्ली के गोपीनाथ कश्यप का कहना है कि हाईवे कई स्थानों पर खतरनाक बना हुआ है।

लामबगड़ में वाहन दलदल में फंस गया था। करीब 20 मीटर तक वाहन को धक्का मारकर बाहर निकाला गया। बुधवार को यहां हाईवे का बीस मीटर हिस्सा गदेरे में उफान से बह गया था।

हालांकि, बीआरओ के कमान अधिकारी राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि बदरीनाथ हाईवे सही हालत में है। जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

भारी बारिश होने पर तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक लिया जाएगा। मौसम साफ होने के बाद ही तीर्थयात्री अपने गंतव्य की ओर बढ़ सकेंगे।

लामबगड़ और सिरोहबगड़ कईं गंवा चुके हैं जान

बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर लामबगड़ और सिरोहबगड़ बड़े डेंजर जोन बन चुके हैं। सिरोहबगड़ चार दशक तो लामबगड़ दो दशक से परेशानी का सबब बना हुआ है। सिरोहबगड़ में कुछ वर्षों तक शांत रहने के बाद वर्ष 2010 से फिर भूस्खलन हो रहा है।

यहां कई बार बिना बारिश के ही भूस्खलन होने लगता है। मूल सड़क दो वर्ष पहले ध्वस्त हो चुकी है। यहां बीआरओ ने मलबे के ऊपर से सड़क बनाई है, जो बहुत संकरी है। लामबगड़ का भी स्थायी हल नहीं निकाला जा सका है।

पिछले वर्ष यहां करीब चार सौ मीटर तक हाईवे अलकनंदा में समा गया था। यहां भी मलबे के ढेर पर ही सड़क बना दी गई, जो आज थोड़ी सी बारिश में मुसीबत बन जाती है। सिरोहबगड़, नैल गांव और नौला पानी में पत्थर गिरने से अभी तक कई लोग जान गंवा चुके हैं।

सेना के ल‌िए भी इसी रास्ते से जाता है सामा‌न

बदरीनाथ हाईवे धार्मिक ही नहीं बल्कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। सीमा पर मुस्तैद सेना के लिए खाद्यान्न और आवश्यक वस्तुएं इसी मार्ग से होकर जाती हैं।

बीआरओ के अधिकारी अपने उच्च अधिकारियों के सामने कई बार लामबगड़ में हाईवे का एलाइनमेंट बदलने का प्रस्ताव रख चुके हैं। लोनिवि प्रांतीय खंड गोपेश्वर ने भी लामबगड़ में चार किमी बाईपास मार्ग के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।

बीआरओ का है कहना
बदरीनाथ हाईवे के लामबगड़ डेंजर जोन से निपटने के लिए इसका एलाइनमेंट बदलना ही एकमात्र विकल्प है। उच्चाधिकारियों को भेजे गए प्रस्ताव पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
-मेजर राहुल श्रीवास्तव, कमान अधिकारी, बीआरओ, पीपलकोटी (चमोली)।
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यमुनोत्री-गंगोत्री हाईवे पर भी बढ़े डेंजर जोन

यमुनोत्री हाईवे पर उत्तरकाशी में बाडिया, सिलाई बैंड और गंगोत्री हाईवे पर धरासू, नालूपाणी, मल्ला से भटवाड़ी एवं सुक्की बैंड वर्षों से डेंजर जोन के रूप में कुख्यात हो चुके हैं।

इनके अलावा यमुनोत्री हाईवे पर जंगलचट्टी और गंगोत्री हाईवे पर सिंगोटी, बंदरकोट, रतूड़ीसेरा, बड़ेथी चुंगी, नेताला, हीना, भाटुकासौड़, लालढांग, विशनपुर, चड़ेथी, सुनगर, गंगनानी आदि भी प्रभावी ट्रीटमेंट न होने से नासूर बनते जा रहे हैं।

हाईवे के ऊपर पहाड़ी से भूस्खलन और नीचे नदी से हो रहे कटाव को रोकने के लिए समय पर प्रभावी उपाय नहीं किए जाने से डेंजर जोन वाले कई हिस्सों में तो अब सड़क का एलाइनमेंट बदलना ही विकल्प नजर आ रहा है।

बीआरओ टीम तैनात
पिछले वर्ष की आपदा के बाद गंगोत्री यात्रा मार्ग का विकल्प तलाशने की कवायद शुरू हुई थी। फिलहाल बीआरओ डेंजर जोन वाले हिस्सों में डोजर आदि मशीनें तैनात रखकर बरसात में किसी तरह हाईवे पर यातायात बहाल रखने की कोशिश में जुटा है।
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