अशोक सिंघल के बाद विश्व हिंदू परिषद में प्रसिद्ध और चर्चित रहे आचार्य गिरिराज किशोर नहीं रहे। हरिद्वार से उनका नाता गहरा और पुराना था।
संतों को राम मंदिर आंदोलन के साथ जोड़ने का काम गिरिराज किशोर ने किया। अयोध्या का विवादित ढांचा गिराने की पटकथा उन्होंने खुद हरिद्वार में बैठकर लिखी।
संयोग देखिए की विवादित ढांचा कार सेवा के माध्यम से गिराने का निर्णय भी बाद में इसी नगर में लिया गया।
लंबे समय तक हरिद्वार में रहे गिरिराज किशोर
विहिप के महामंत्री रहे आचार्य गिरिराज किशोर लंबे समय तक हरिद्वार में रहते रहे। ललतारौ स्थित विहिप के कर्मश्री और गंगाश्री भवनों में आचार्य ने महीनों बिताए।
स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के परमार्थ आश्रम, कच्छी आश्रम, अखंड परमधाम तथा सत्यमित्रानंद के भारत माता मंदिर में आचार्य महीनों रहे। दूधाधारी मंदिर से भी उनका रिश्ता रहा।
अशोक सिंघल और आचार्य गिरिराज किशोर ने हरिद्वार में बैठकर अयोध्या का विवादित ढांचा गिराने की योजनाएं कई बार बनाई।
देशभर के संतों को विहिप से जोड़ने का काम किया
आचार्य की पहल पर इस नगरी में संतों के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठकें हुईं। धर्म संसद कईं बार आयोजित की।
वस्तुत: आचार्य गिरिराज किशोर ने हरिद्वार मे रहते हुए देशभर के संतों को विहिप से जोड़ने का काम कर दिखाया।
समूची विश्व हिंदू परिषद और संत समाज जानते हैं कि आचार्य के प्रयासों से ही कारसेवा का वह महा अभियान चल पाया था। पिछले कुछ वर्षों से बीमारी के कारण आचार्य हरिद्वार नहीं आ पाए। अलबत्ता वर्ष 2005 तक उनका आगमन रहा।