उत्तराखंड सरकार द्वारा अब तक 85 नोटिस पाने के बाद चर्चा में आए योगगुरु रामदेव एक बार फिर से घिरते नजर आ रहे हैं। इस बार रामदेव की कंपनियों पर फूड प्रोडक्ट पर भी नोटिसों की झड़ी लगी हुई है।
नोटिसें क्वालिटी पर प्रश्नचिन्ह!
डेढ़ साल के दौरान फूड प्रोडक्ट से जुड़ी रामदेव की कंपनियों को दो दर्जन से ज्यादा नोटिस मिल चुके हैं। देश के विभिन्न राज्यों के खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से भेजे गए अधिकांश नोटिसें क्वालिटी पर तो प्रश्नचिन्ह नहीं है लेकिन आरोग्य जैसे शब्द लिखने पर सवाल उठाए गए हैं।
छह मामले पहले से दर्ज
16 अगस्त 2012 को खाद्य सुरक्षा विभाग ने हरिद्वार में दिव्य योग मंदिर से रामदेव की कंपनियों की ओर से बनाए गए खाद्य पदार्थों के सैंपल भरे थे।
सरसों तेल, शहद और बेसन आदि के सैंपल भरे जाने के बाद विभाग की ओर से कंपनियों के खिलाफ एडीएम कोर्ट में छह मामले दर्ज कराए गए थे।
कई राज्यों से 25 से ज्यादा नोटिस
इसके बाद से अब तक पतंजलि योगपीठ से जुड़ी फूड प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों को देशभर से नोटिस मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक यूपी, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों से 25 से ज्यादा नोटिस जारी हो चुके हैं।
हालांकि प्रोडक्ट की क्वालिटी को लेकर कोई बड़ा आरोप बाबा रामदेव की कंपनियों पर नहीं है। अधिकतर आरोप भ्रामक प्रचार को लेकर लगाए गए हैं।
कंपनियों की ओर से आरोग्य जैसे शब्द लिखने पर आपत्ति जताई गई है। इस पर कंपनियों से जवाब मांगा गया है। हालांकि पतंजलि योगपीठ से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना है कि यह रामदेव को घेरने की साजिश का हिस्सा है।
पतंजलि योगपीठ और उससे जुड़े ट्रस्टों पर हाल-फिलहाल ही हरिद्वार जिला प्रशासन की ओर से जमीनों से जुड़े 85 मामले दर्ज कराए गए हैं।
इनमें स्टांप चोरी के 54, जमीन खरीद की शर्तों के उल्लंघन के 23, ग्राम सभा की जमीन पर कब्जों के तीन और रिवीजन से संबंधित पांच मुकदमे हैं।