जमीनों को लेकर रामदेव पर मुकदमे दर्ज करने वाली कांग्रेस के शासनकाल में ही बाबा को पहली बार जमीन खरीदने की अनुमति मिली थी। सरकार ने वर्ष 2004 में रामदेव के दिव्य योग मंदिर को जमीन खरीदने की अनुमति दी।
तब से लेकर वर्ष 2010 तक रामदेव की संस्थाओं ने चार बार जमीनें खरीदी। सरकार की ओर से उन्हें 301.501 हेक्टेयर जमीन क्रय करने की परमिशन दी गई।
अनुमति सरकार से मांगी थी
वर्ष 2004 में रामदेव हरिद्वार के बाबा रामदेव से विख्यात योगगुरु बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहे थे। दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट के नाम से जमीन खरीदने की अनुमति सरकार से मांगी थी।
शासन ने एक जून 2004 को शासनादेश संख्या 19 भूक्रय/राजस्व/2004 के माध्यम से 40.033 हेक्टेयर जमीन खरीदने की अनुमति प्रदान की। उत्तराखंड बनने के बाद रामदेव की ओर से पहली बार जमीन का बड़ा सौदा किया गया था।
जमीन खरीद के इस दौर में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। इसके बाद तीन बार रामदेव को जमीन खरीद की अनुमति भाजपा के शासन काल में मिली।
आठ जुलाई 2008 को पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के नाम से 56.468 हेक्टेयर और 16 जुलाई 2008 को पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के नाम से 50 हेक्टेयर भूमि खरीदी गई।
कांग्रेस के शासनकाल में ही रामदेव के साम्राज्य की नींव
वर्ष 2010 में पतंजलि विश्वविद्यालय और पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट ने 155 हेक्टेयर भूमि खरीदी। 26 फरवरी 2010 को शासनादेश जारी यह जमीन खरीदने की अनुमति प्रदान की गई। अब रामदेव की जमीन खिसकाने में लगी कांग्रेस के शासनकाल में ही आज के योगगुरु रामदेव के साम्राज्य की नींव पड़ी थी।