नेचुरोपैथी में पहुंचे लोगों से बातचीत के दौरान रामदेव ने कहा कि वैश्विक महामारी दुनिया की सबसे बड़ी बीमारी है। जिसके सामने दुनिया के बड़े-बड़े देेश लाचार और धराशायी हो गए। इलाज में एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग स्याणा बनकर अस्पताल पहुंचे और मर गए।
मेडिकल से जुड़े कई लोग भी मर गए, लेकिन पतंजलि का सेंटर चलाने वाला कोई भी नहीं मरा। बाबा ने कहा कि आने वाले पांच सालों में शोध होगा, आखिर अस्पताल जाने वाले कोरोना से क्यों मरे।
जिन लोगों ने घरों में योग किया और कोरोनिल ली, वो कैसे बच गए। उन्होंने कहा कि हर बीमारी का योग और नेचुरोपैथी में इलाज है। इसका वह प्रमाण देने को भी तैयार हैं, लेकिन फिर भी चारों तरफ षड्यंत्र है। चारों तरफ अंधविश्वास है।
बीमारी 2019 में आई, किट 2017 में कैसे खरीद ली
स्वामी रामदेव ने अपने फेसबुक पर एमबीबीस एमडी डॉ. तरुण कोठारी का एक वीडियो शेयर किया है। इसमें डॉ. कोठारी ने रामदेव के विचारों को सही ठहराते हुए आईएमए अध्यक्ष डॉ. जयालाल से दस सवाल पूछे हैं।
जिसमें सबसे बड़ा सवाल है कि कोविड 2019 में आई। दावा किया कि कोविड की डायग्नोस्टिक किट भारत समेत दुनिया के कई देशों ने 2017-18 में कैसे खरीद ली। बीमारी बाद में आई और पहले ही किट खरीद ली गई। ऐसे ही कई सवाल पूछे हैं।