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'गौवध करने वाला व्यक्ति सच्चा मुसलमान नहीं'

Wed, 12 Nov 2014 12:58 PM IST
गिरीश रंजन तिवारी/ अमर उजाला, नैनीताल
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गौवध करने वाला व्यक्ति सच्चा मुसलमान नहीं है, गाय हमारे लिए राष्ट्रमाता के समान है, मैं बीते पचास साल से गौमाता के संरक्षण के लिए प्रयासरत हूं और अंतिम सांस तक रहूंगा।
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गौमाता के संरक्षण के खुले समर्थक
इस्लाम में गाय की कुर्बानी का कोई उल्लेख नहीं है न ही इसे जरूरी बताया गया है। गौमाता के संरक्षण का खुला समर्थक होने के लिए यदि मुझे इस्लाम से खारिज भी कर दिया जाए तो मुझे आपत्ति नहीं है। ये कहना है उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी का।

अमर उजाला से बातचीत में डॉ. कुरैशी ने कहा कि कुछ लोग उन पर आरोप लगाते हैं कि वे भाजपाराज में अपनी गवर्नरी बचाने को गौमाता के संरक्षण की बात कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को मानसिक रूप से दीवालिया करार दिया।
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उन्होंने कहा कि गवर्नरी बचाने को तो वे पहले ही सुप्रीम कोर्ट जा चुके हैं और गौमाता के संरक्षण के उनके प्रयास पचास साल से जारी हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा को भी उन्होंने इस संबंध में प्रतिवेदन दिया था और गत कुंभ मेले के दौरान भी इस बात को उठाया था।

डॉ. कुरैशी ने कहा कि सऊदी अरब के देशों में आज भी ईद पर गौकशी नहीं होती। उन देशों में तो गाय होती ही नहीं है। इस्लाम में भी गाय की कुर्बानी का जिक्र नहीं है। यहां तक कि बाबर ने हुमायूं को वसीयत करके हिदायत दी थी कि हिंदुस्तान में राज करने में यह ध्यान रखा जाए कि गाय की कुर्बानी नहीं होनी चाहिए।

हिंदू-मुस्लिम की भावनाओं का आदर हो
भारतीय मुसलमान हिंदुओं की भावना का आदर कर देश में गौवध पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए आगे आएं तो इससे आपसी भाईचारा बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और हिंदू मुस्लिम एकता के लिए एक-दूसरे की भावनाओं और परंपराओं का आदर किया जाना चाहिए। वे सतत इसके लिए प्रयासरत हैं।

डॉ. कुरैशी ने जामा मस्जिद के इमाम मौलाना सय्यद अहमद बुखारी की आलोचना करते हुए कहा कि अपने पुत्र के अभिषेक कार्यक्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बजाय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आमंत्रित करके राष्ट्र विरोधी मानसिकता का परिचय दिया है।

क्योंकि एक ओर पाकिस्तान लगातार सीमा पर गोलीबारी कर रहा है और हमारे सैनिकों व निर्दोष नागरिकों को मार रहा है। ऐसे में इमाम बुखारी ने पाक के प्रधानमंत्री को निजी कार्यक्रम में आमंत्रित कर उन्हें अपने देश के प्रधानमंत्री से ज्यादा महत्वपूर्ण साबित करने का प्रयास करके क्या संदेश देना चाहा ये समझ से परे है।
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