उन्होंने कहा कि पतंजलि योगपीठ में पिछले दस वर्षों में हजारों रोगियों का शल्य चिकित्सा से इलाज किया गया है। इसमें बवासीर, भगंदर, परिकर्तिका, नाड़ीव्रण, पिनोडिनल, हर्निया, हाइड्रोसिल, मूत्र ग्रंथि रोग आदि की सर्जरी की जाती है।
उन्होंने कहा कि यानी भगंदर यानी फिश्चुला का आधुनिक चिकित्सा में एलोपैथी में भी इलाज नहीं है। एम्स, मेदांता, अपोलो, मैक्स, फोर्टिस जैसे अस्पतालों से मरीज पतंजलि अस्पताल में इलाज करवाने आते हैं।
उन्होंने कहा कि पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय में परास्नातक सर्जरी शिक्षा दी जाती है। कई योग्य डॉक्टर रोगियों की सेवा कर रहे हैं। आयुर्वेद में एनेस्थीसिया और एंटीबायोटिक के सवाल पर आचार्य ने कहा कि एलोपैथी में भी एनेस्थीसिया नहीं है और वह अलग विभाग है। जबकि आयुर्वेदिक में कारगर एंटीबायोटिक हैं।