उत्तराखंड में 16-17 जून को केदारघाटी की आपदा में चोराबाड़ी ग्लेशियर बड़ी वजह बना। आपदा के दौरान वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के ग्लेशियर के पास लगे दो आटोमैटिक वेदर स्टेशन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए।
तीन आटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित किए थे
भविष्य में इस तरह की स्थिति से उपकरण प्रभावित न हों, इसे लेकर संस्थान सतर्क हो गया है। अब इनके लिए नई जगह तलाशी जा रही है। संस्थान ने केदारघाटी में तीन आटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित किए थे।
इनसे इन्हें ग्लेशियरों के मौसम की पल-पल की जानकारी हासिल हो रही थी। एक उपकरण इतनी ऊंचाई पर था कि जहां आपदा का असर नहीं पहुंचा, लेकिन चोराबाड़ी ग्लेशियर के पास स्थित दोनों स्टेशन तबाह हो गए।
असामान्य वर्षा की स्थिति में खतरा
जिस वक्त पानी का रेला आया, दो कर्मी भी यहां मौजूद थे, जो किसी तरह बाल-बाल बचे। संस्थान के ग्लेशियोलाजिस्ट डॉ. डीपी डोभाल के अनुसार असामान्य वर्षा की स्थिति में चोराबाड़ी ग्लेशियर के पास खतरा बना रहेगा, लिहाजा इन्हें अन्यत्र स्थापित किए जाने पर विचार हो रहा है।