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मंत्रियों के समारोह में भूख से 'तड़पते' हैं कलाकार

Fri, 31 Jan 2014 01:55 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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लोक कलाकारों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने के मकसद से उत्तराखंड संस्कृति विभाग ने बैठक की तो एक चौकाने वाली बात सामने आई।
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प्रमुखता से अवसर दिए जाने चाहिए
बैठक में कलाकारों ने कहा कि विभाग उन्हीं दलों को मौके देता है, जिनकी अफसरों से पहचान है। गुरुवार को बैठक में गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार से आए दलनायकों ने कहा कि जो भी दल सक्रिय हैं, उन सबको प्रमुखता से अवसर दिए जाने चाहिए।

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उन्होंने कहा कि मंत्रियों के कार्यक्रमों में उन्हें सुबह-सवेरे बुला लिया जाता है, लेकिन प्रस्तुतियां शाम को दी जाती हैं। इस बीच पूरे दिन कलाकार भूखे-प्यासे रहते हैं लेकिन न तो संस्कृति विभाग, न ही आयोजक इस ओर ध्यान देते हैं।
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विभागीय निदेशक वीना भट्ट ने कलाकारों की समस्याओं के निस्तारण का भरोसा दिलाया। बताया कि हर दो माह पर यह बैबैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में विभागीय अधिकारी बलराज नेगी, कलाकार गिरीश पहाड़ी, अभिषेक मैंदोला, बाबूराम शर्मा, सुरेंद्र सिंह राणा, वीरेंद्र बिष्ट, भैरव राय, राजेंद्र मेहता, गिरीश बरगली, प्रेम देवराड़ी आदि उपस्थित रहे।
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ये भी समस्याएं
- कार्यक्रम की सूचना ऐन वक्त पर दी जाती है। प्रदेश से बाहर जाने के लिए रिजर्वेशन नहीं हो पाता। इससे महिला कलाकारों को खासी परेशानियां होती हैं।
- कई जगह आयोजक कलाकारों के रहने की व्यवस्था तक नहीं करते। कलाकार अपने खर्चे पर कहीं रहें तो विभाग की ओर से इस मद में राशि नहीं दी जाती।

...ताकि परिवार को मिले मदद
कलाकारों ने कहा कि सरकार ने कलाकारों के लिए पेंशन 60 वर्ष की उम्र के बाद देना तय किया है। इससे पहले किसी तरह की मदद नहीं मिलती।

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उन्होंने कहा कि कलाकारों के लिए कोई बीमा योजना बनाई जाए, ताकि पेंशन उम्र से पहले मौत हो जाने पर कलाकार के परिवार को आर्थिक मदद मिल सके। निदेशक भट्ट ने जल्द ही बीमा कंपनियों से इस पर चर्चा की बात कही।
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