बिजली के तारों से निकलने वाली चिंगारी से कहीं जंगल में आग न लग जाए, इसलिए शासन ने आठ जिलों के जंगल से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों की जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही वनाग्नि पर नियंत्रण के लिए पटवारी चौकियों को क्रू-स्टेशनों में बदलने की योजना बनाई है।
इसके साथ ही एसडीआरएफ, आपदा क्यूआरटी और अन्य अर्द्धसैनिक बलों का भी वनाग्नि पर नियंत्रण में सहयोग लेने की जरूरत पर बल दिया गया। इस बाबत जारी प्रमुख सचिव आरके सुधांशु के आदेश में जंगलों में आग लगाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए कहा गया है।
प्रदेश में 20 अप्रैल तक वनाग्नि की 799 घटनाएं हुई जिससे 1133 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इनमें से 90 फीसदी घटनाएं अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, पौड़ी गढ़वाल, पिथौरागढ़, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी एवं चंपावत जिले में हुईं। प्रमुख सचिव ने विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ वनाग्नि नियंत्रण, प्रबन्धन के लिए राजस्व विभाग, ग्राम प्रधानों एवं स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका तय करते हुए उनका सक्रिय सहयोग प्राप्त करने पर जोर दिया है।