राजधानी देहरादून में 2010 में हुए अनुपमा हत्याकांड में मुख्य आरोपित राजेश गुलाटी को कोर्ट से जमानत नहीं मिली।
कोर्ट में सभी सबूत पेश हो चुके हैं
मंगलवार को कोर्ट में बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि राजेश तीन साल से जेल में बंद है। उसके विरुद्ध कोई सीध सबूत नहीं मिला है, पुलिस के पास मौजूद साक्ष्यों में भी विरोधाभास है। कहा कि कोर्ट में सभी सबूत पेश हो चुके हैं।
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जनता की ओर से कोई गवाह नहीं है। ऐसे में राजेश जमानत पर रहकर न तो कोई सबूत नष्ट कर सकता है, न किसी गवाह को प्रभावित कर सकता है। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के तर्कों के आधार पर जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया।
बता दें कि वर्ष 2010 में अनुपमा का शव उसके घर से बरामद किया गया था। बाद में राजेश की निशानदेही पर उसका कटा पैर मालसी के जंगल से मिला था।
फोटोग्राफर के बयान दर्ज
अनुपमा हत्याकांड में फोटोग्राफर के बयान दर्ज किए गए। मामले में यह 33वें गवाह के बयान थे। अन्य गवाहों के बयान पांच फरवरी को दर्ज किए जाएंगे।
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एडीजे धर्म सिंह की कोर्ट में पुलिस फोटोग्राफर सतीश चंद्र के बयान दर्ज किए गए। 12 दिसंबर 2010 को अनुपमा गुलाटी का शव बरामद होने के बाद कांस्टेबल सतीश फोरेंसिक टीम संग राजेश के घर पहुंचे थे।
मौके पर खींची थी तस्वीरें
उन्होंने मौके पर तस्वीरें खींची थीं। 15 दिसंबर 2010 को राजेश की निशानदेही पर मसूरी रोड पर मालसी पुल के नीचे अनुपमा के पैर का पंजा बरामद करने के दौरान भी सतीश ने फोटो ली थीं। कोर्ट में ये तस्वीरें सतीश के सामने रखी गईं।
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सतीश ने इनकी पहचान अपनी खींची फोटो के तौर पर की। इस दौरान राजेश गुलाटी, उसके पिता, मां और बहन-जीजा कोर्ट में मौजूद रहे।
उधर, राजेश की जमानत पर मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी। बचाव पक्ष के समय मांगने पर 28 जनवरी की तारीख तय गई।