दिनचर्या और व्यवहार में कोई बदलाव नहीं
देहरादून में पत्नी अनुपमा की हत्या में आजीवन कारावास की सजा पाने के बाद राजेश गुलाटी पहले दिन जेल में नॉर्मल रहा। उसकी दिनचर्या और व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है। गुलाटी को कैदी नंबर के साथ ही कपड़े भी उपलब्ध करा दिए गए हैं।
अभी उसे बाकी बंदियों के बीच ही रखा गया है। साथी बंदियों से बातचीत में गुलाटी ने हाईकोर्ट से राहत मिलने की उम्मीद जताई है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने का आदेश का हवाला भी दिया।
11 दिसंबर 2010 को सामने आए बहुचर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड में इंजीनियर पति राजेश गुलाटी को शुक्रवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। शुक्रवार शाम को जेल पहुंचे राजेश गुलाटी ने रोजमर्रा की तरह भोजन किया।
राजेश गुलाटी को हाईकोर्ट से राहत मिलने की उम्मीद
जेल में राजेश गुलाटी को मिला बेस्ट कैदी का अवार्ड
शनिवार सुबह उसने दाल के साथ दो रोटी खाई। सजा के बाद जेल में पहले दिन उसकी दिनचर्या पहले जैसी ही रही। उसका व्यवहार भी नॉर्मल रहा। हालांकि, साथी बंदियों ने जरूर राजेश को हिम्मत बांधने वाली बात कही। सूत्रों का कहना है कि राजेश गुलाटी को हाईकोर्ट से राहत मिलने की उम्मीद है। बंदियों से बातचीत में राजेश ने यह बात कही है।
राहत का आधार सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश को बताया गया है। जेल सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को उसकी दिनचर्या और व्यवहार में बदलाव नहीं आया, क्योंकि वह पहले से ही सजा के लिए मानसिक रूप से तैयार था।
राजेश को कैदी वाले कपड़े भी उपलब्ध करा दिए गए हैं। सुद्धोवाला जेल में साढे़ पांच सौ से छह सौ के करीब कैदी हैं। जेल में राजेश गुलाटी का आचरण अच्छा होने के कारण तीन माह पहले उसे बेस्ट बंदी का अवार्ड भी मिला था।
जेल में मिलीं अधिवक्ता
राजेश ने पत्नी अनुपमा के 72 टुकड़े कर के डीप फ्रीजर में रख दिए थे
सुद्धोवाला जेल में शनिवार को एक महिला अधिवक्ता ने राजेश गुलाटी से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, राजेश ने महिला अधिवक्ता के साथ तमाम कानूनी पहलुओं पर चर्चा की।
माना जा रहा है कि अधिवक्ता से बातचीत के बाद राजेश को जेल से बाहर आने की उम्मीद जगी है। शुक्रवार को सजा के बाद भी राजेश ने अदालत परिसर में अपने अधिवक्ताओं से बातचीत की थी।
बता दें कि 2010 में हत्यारे राजेश गुलाटी ने अपनी पत्नी अनुपमा के 72 टुकड़े कर के डीप फ्रीजर में रख दिए थे और रोजाना एक-एक टुकड़ा मसूरी मार्ग स्थित जंगल में फेंकता था।