नशे की लत में आए युवाओं के पुनर्वास की भी व्यवस्था होगी
नीति में जिन युवाओं को नशे की लत लग चुकी है, उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए मानसिक रोग अस्पतालों को उच्चीकृत कर काउंसलर एवं मनोचिकित्सक की तैनाती की जाएगी। नशा मुक्ति की दिशा में काम कर रहे एनजीओ के माध्यम से भी पुनर्वास कराया जाएगा। एनजीओ को राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। जेल में सजा काट रहे कैदियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य की व्यवस्था की जाएगी। नशा मुक्ति केंद्रों में पुनर्वास, उपचार के निशुल्क दवा, टेलीमेडिसिन के माध्यम से काउंसिलिंग का प्रावधान किया जाएगा।
हर जिले में पुनर्वास केंद्र बनाने की जरूरत
बैठक में पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि प्रत्येक जिले में पुनर्वास केंद्र बनाए जाने चाहिए। जो लोग नशे के धंधे में संलिप्त है, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई का प्रावधान करने की आवश्यक है। इसके साथ ही जो एनजीओ सरकार के सहयोग से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं उनके लिए नियम बने। सही ढंग से काम न करने वाले एनजीओ के विरुद्ध भी कार्रवाई की जा सके।
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नशा मुक्ति के लिए बनने वाले नियम शिक्षण संस्थानों में भी हो लागू
सचिव डॉ. बीवीआरसी पुरूषोत्तम ने सुझाव दिया कि नशा मुक्ति के लिए जो नियम बनाए जाते हैं। उन्हें सभी सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों में भी लागू करने की आवश्यकता है।