फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केदारनाथ के रावल का भी रहा है विवादों से नाता

विज्ञापन
विज्ञापन
केदारनाथ मंदिर के वर्तमान रावल भीमा शंकर लिंग का भी विवादों से नाता रहा है। चाहे वह रावल पद पर पट्टाभिषेक हो या पिछले वर्ष आई आपदा के बाद केदारनाथ पूजा का मामला हो।
विज्ञापन


शंकराचार्य के साथ चला विवाद
स्वयं को जगद्गुरु कहलाने के मसले पर द्वारिका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के साथ इनका लंबा वाकयुद्ध चला।

पढ़ें,बदरीधाम के रावल पर आरोप लगाने वाली महिला का 'सच'

ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में हिमवत वैराग्यपीठ है। यहां गद्दीस्थल पर कर्नाटक के वीर शैवलिंगायत संप्रदाय के जंगम पुरुष को रावल की जिम्मेदारी दी जाती है।

पट्टाभिषेक का हुआ था विरोध

भीमा शंकर लिंग की नियुक्ति 325 वें रावल के रूप में वर्ष 2002 में हुई थी। उनका पट्टाभिषेक भारत वर्ष के पांच पीठों के पंचाचार्यों ने किया था।

उनके पट्टाभिषेक होने से पहले कुछ व्यक्तियों ने विरोध में आंदोलन भी किया था।

रावल की समाध‌ि के बाद बनते हैं रावल
परंपरा के अनुसार, रावलों की समाधि लेने के बाद ही नए रावल की नियुक्ति होती है। 324वें रावल सिद्देश्वर लिंग ने अचानक अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था।

पढ़ें, बदरीधाम के रावल पर आरोप लगाने वाली महिला का 'सच'

जब भीमाशंकर लिंग की नियुक्ति हो रही थी, तो लोगों ने बिना मुंडन पट्टाभिषेक पर विरोध किया।

अक्सर गायब रहते हैं रावल

पट्टाभिषेक से पहले रावल ने तत्कालीन मंदिर समिति के अध्यक्ष को शपथ पत्र दिया था। जिसमें तीन शर्तें थी। पहली थी मई, जून, सितंबर और अक्तूबर माह में केदारनाथ धाम में रहकर धार्मिक उपदेश और शिक्षा देने का कार्य।

पढ़ें,छेड़छाड़ः बदरीनाथ के मुख्य पुजारी गिरफ्तार

शेष माह ऊखीमठ गद्दीस्थल पर रहकर यह कार्य करना। दूसरी शर्त थी भक्तों और शिष्यों से प्राप्त भेंट को मंदिर समिति के कोष में जमा करना। तीसरी शर्त थी ब्रह्मचर्य का पालन करना।

चर्चा में रहता है गायब रहना
रावल बनते ही भीमालिंग रावल ऊखीमठ से गायब रहने लगे। पंचकेदारों की डोली प्रस्थान या आगमन की बात हो या ऊखीमठ व केदारनाथ में रहकर धर्मप्रचार हो, रावल का गायब रहना चर्चा का विषय रहता है।
विज्ञापन

मिलता है यहां पर रावल को वेतन

रावल केदारनाथ मंदिर में पूजा नहीं करते हैं। यहां पूजा के लिए प्रधान पुजारी अलग से नियुक्त होते हैं। रावल और पुजारी श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कर्मचारी होते हैं और उनको वेतन मिलता है।

हालांकि वर्तमान रावल भीमा शंकर लिंग तनख्वाह नहीं लेते हैं।

पढ़ें,छेड़छाड़ः बदरीनाथ के मुख्य पुजारी गिरफ्तार

रावल के यात्राकाल में केदारनाथ और शीतकाल में ऊखीमठ में बहुत कम दर्शन होते हैं। इनका अधिकतर समय बाहरी प्रदेशों में बीतता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें